
देहरादून(आरएनएस)। सरकारी जमीनों को सस्ते में आवंटित कराने का झांसा दे 72 वर्षीय बुजुर्ग से उनके हॉस्टल के किरायेदार ने 38 लाख रुपये से अधिक ठग लिए गए। आरोपियों ने फर्जी सरकारी दस्तावेज, जाली मुहरों और सेवानिवृत्त अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर इस वारदात को अंजाम दिया। एसएसपी कार्यालय में हुई शिकायत पर पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी, उसके बेटे-बेटी और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सुद्धोवाला स्थित बीएफआईटी कॉलेज के निकट कम्फर्ट होम्स हॉस्टल के संचालक गौरव अजमानी ने अपने 72 वर्षीय पिता ब्रह्म प्रकाश अजमानी के साथ हुई इस ठगी में शिकायत की।कहा कि मुख्य आरोपी अशोक भटनागर पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से पीड़ित के हॉस्टल में ही किरायेदार और कैंटीन संचालक के रूप में रह रहा था। इसी दौरान उसने बुजुर्ग का विश्वास जीता और खुद की विभिन्न सरकारी विभागों में गहरी पहुंच होने का झूठा दावा किया। आरोपी ने साजिश के तहत पीड़ित को देहरादून, सहारनपुर, चकराता और नैनीताल में स्थित विभिन्न सरकारी संपत्तियों का सस्ते दामों पर आवंटन कराने का झांसा दिया। अपना विश्वास कायम करने के लिए वह कई बार पीड़ित को संबंधित संपत्तियों के स्थानों पर लेकर गया और जल्द ही आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने का झूठा आश्वासन देता रहा। आरोपी ने समय-समय पर फर्जी आवंटन पत्र, भुगतान रसीदें और आधिकारिक दस्तावेज सौंपे। बाद में प्रारंभिक जांच करने पर पता चला कि इन दस्तावेजों पर उन अधिकारियों के हस्ताक्षर थे जो पहले ही रिटायर हो चुके हैं, या फिर ऐसे पदनाम दर्ज थे जिनका सरकारी विभाग में कोई अस्तित्व ही नहीं है। इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए आरोपियों ने बुजुर्ग से लगभग 38.18 लाख रुपये ऐंठ लिए। रकम किसी सरकारी प्राधिकरण के खाते में जमा नहीं की गई। यह पूरी रकम उसके बेटे देव भटनागर, बेटी माही भटनागर और अन्य सहयोगियों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई। पीड़ित को आज तक किसी भी संपत्ति का न तो आवंटन मिला और न ही कब्जा। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित पक्ष ने पुलिस के उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई। इंस्पेक्टर पटेलनगर विनोद गुसाईं ने बताया कि गुरुवार को अशोक भटनागर, देव भटनागर, माही भटनागर और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जाली दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच की जा रही है।

