
रुद्रपुर(आरएनएस)। श्रमिक संयुक्त मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई गुंडा एक्ट की कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मजदूर और सामाजिक संगठनों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई तत्काल निरस्त करने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया कि दलजीत सिंह के खिलाफ की जा रही कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और न्यायालयों के आदेशों की अनदेखी है। मोर्चा नेताओं का कहना है कि जिन चार मुकदमों को आधार बनाकर नोटिस जारी किया गया है, उनमें से एक मामले में दलजीत सिंह पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं, जबकि एक अन्य मामले में उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त है।इसके बावजूद इन मामलों को रिपोर्ट में शामिल किया गया। मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि शेष मामलों में भी न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू करना दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक है। उनका कहना है कि नोटिस में दलजीत सिंह को जिला बदर करने की संस्तुति का उल्लेख किया गया है, जबकि वह लंबे समय से पंतनगर स्थित एक औद्योगिक इकाई में कार्यरत हैं। ऐसी कार्रवाई उनके रोजगार और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि दलजीत सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे श्रमिक आंदोलनों के दौरान दर्ज हुए थे, इसलिए उन्हें गुंडा घोषित करने की कार्रवाई उचित नहीं है। नेताओं ने आरोप लगाया कि जुलाई में होने वाले वेतन समझौते से पहले जून में नोटिस जारी किया जाना श्रमिक आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश का संकेत देता है। मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी और कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तराखंड में विस्तारित किया जाएगा। इस दौरान हरेन्द्र सिंह, धीरज जोशी, कैलाश भट्ट, शिवदेव सिंह, विश्वजीत सरकार, बालम सिंह रावत, उमेश प्रजापति और जगदीश चंद्र समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
