
विकासनगर(आरएनएस)। दस दिन के प्रवास पर निकले बाशिक महासू महाराज की देव पालकी रविवार को अपने मूल स्थान मैंद्रथ पहुंची। गांव के एक ही घर में रात्रि प्रवास पूजन के बाद सोमवार को देव पालकी को विधि विधान से गर्भ गृह में विराजमान किया जाएगा। इस दौरान देव दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। 28 मई को देव पालकी मंदिर से प्रवास पर निकली थी। उस दिन पुरटाड़ में देव पालकी का बागड़ी पूजन किया गया। दो दिन निनूस, एक दिन चौसाल, दो दिन बास्तील में बागड़ी पूजन के बाद देव पालकी तीन जून को कैमाड़ा बुग्याल के जखोली मेले में पहुंची। जहां दो दिनो तक जौनसार बावर, रवाईं, जौनपुर के साथ ही हिमाचल प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने देव दर्शन किए। कैमाड़ा बुग्याल के जखोली मेले में पूजन के बाद पांच जून को देव पालकी ने मूल मंदिर मैंद्रथ के लिए प्रस्थान कर दो दिन बागी गांव में बागड़ी पूजन हुआ, जबकि रविवार को मैंद्रथ गांव पहुंची। देव पालकी के मैंद्रथ पहुंचते ही गांव की सीमा पर श्रद्धालुओं ने परंपरागत तौर पर स्वागत किया। महिला और पुरुष देव हारुल गाते हुए पालकी को गांव तक लेकर आए। इस दौरान आस पास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हुए थे। श्रद्धालुओं में पालकी को कांधा लगाने के लिए होड़ मची रही। गांव में एक परिवार के घर पर बागड़ी पूजन के पालकी को ले जाया गया। दोपहर बाद पालकी ने श्रद्धालु के घर में प्रवेश किया, जिसके बाद पूरी रात जागरण किया गया। मौके पर शाठी बिल के बजीर दीवान सिंह राणा, प्यारेलाल सेमवाल, मोहनलाल सेमवाल, रामलाल सेमवाल, पुजारी अभिदत्त, सूरत राम सेमवाल, अभिराम जोशी, ठाणी अजय राणा, देव माली भवान सिंह पंवार, विक्रम पंवार, रघुवीर पंवार, रवि पंवार, बलबीर राणा, मेहर चंद्र, कुंदन सिंह, नीरज, हरि सिंह आदि मौजूद रहे।
