
देहरादून(आरएनएस)। आपदा कभी चेतावनी देकर नहीं आती, लेकिन सही प्रशिक्षण कई जिंदगियां बचा सकता है। शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में 15वीं बटालियन एनडीआरएफ के सहयोग से आयोजित कम्युनिटी रिस्पॉन्स वर्कशॉप में छात्रों को आपदा के तत्काल प्रतिक्रिया, आवश्यक बचाव तकनीकों और जीवन रक्षक उपायों का व्यवहारिक प्रशिक्षण देने के दौरान विशेषज्ञों ने यह बात कही। कार्यक्रम में एनडीआरएफ के अधिकारियों ने वर्ष 2005 में स्थापित नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) की स्थापना, कार्यप्रणाली, विभिन्न घटकों, आयु सीमा, भूमिकाओं व जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ देशभर में प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के दौरान राहत व बचाव कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाती है। कठिन परिस्थितियों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित बल के रूप में कार्य करती है। वर्कशॉप का मुख्य आकर्षण कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का लाइव प्रशिक्षण रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि वयस्कों और बच्चों को दिए जाने वाले सीपीआर की तकनीक, दबाव की तीव्रता और प्रक्रिया एक-दूसरे से काफी अलग होती है। प्रतिभागियों को व्यवहारिक तरीके से समझाया गया कि सही परिस्थिति में सही तकनीक का उपयोग किस प्रकार किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। छात्रों को यह भी सिखाया गया कि आपातकालीन परिस्थितियों में सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए किस प्रकार इम्प्रोवाइज्ड स्ट्रेचर तैयार किया जा सकता है।


