

उत्तरकाशी। हर्षिल घाटी में पहली बार आयोजित नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। बगोरी गांव के पंचायती भवन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हर्षिल, झाला, धराली, गंगोत्री और मुखबा गांवों से आए 30 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जैव विविधता की पहचान, हिमालयी वनस्पतियों, पक्षियों और वन्यजीवों के व्यवहार, नेचर ट्रेल्स के विकास तथा पर्यटकों के साथ संवाद कौशल से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें क्षेत्र के छिपे प्राकृतिक मार्गों को चिह्नित कर पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद बगोरी ग्राम प्रधान रंजीता धौबरा ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत हर्षिल घाटी नए अवसरों का केंद्र बन रही है और इस प्रकार के प्रशिक्षण स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रहे हैं। हर्षिल ग्राम प्रधान सुचित्रा रौतेला ने कहा कि ऐसी पहल से युवाओं को सही दिशा और अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे पर्यटन क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य क्षेत्र के छिपे नेचर ट्रेल्स की पहचान कर उन्हें पर्यटन से जोड़ना है।
कार्यक्रम में संस्था के निदेशक पंकज शर्मा और प्रशिक्षक राजीव भी मौजूद रहे। बताया गया कि लगभग दो वर्ष पूर्व पर्यटन विभाग की ओर से इसी क्षेत्र में गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें प्रशिक्षित कई प्रतिभागी इस बार नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण में भी शामिल हुए।

