
विकासनगर(आरएनएस)। जौनसार बावर में आध्यात्मिक जागरण की दृष्टि से चालदा महाराज की प्रवास यात्रा का विशेष महत्व है। जब भी देवता की यात्रा विभिन्न खतों में होती है तो हजारों श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं। स्थानीय ग्रामीण भंडारे की व्यवस्था करते हैं। विगत वर्षों में भंडारों में शराब व मांस परोसने का प्रचलन था। अब खत कोरु के निवासियों ने इसे समाप्त कर भंडारे में घी परोसने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से खतवासियों ने नई मिसाल कायम की है। जौनसार बावर में चालदा महासू देवता की दो प्रमुख प्रवास यात्राएं होती हैं। एक चालदा महाराज की प्रवास यात्रा जौनसार बावर के कुछ हिस्सों व हिमाचल तक जाती है। इसकी डोली वर्तमान में हिमाचल के पश्मी में विराजमान है। दूसरी गढ़ का चालदा के नाम से जानी जाती है। यह जौनसार के लगभग 14 खतों में परिक्रमा करती है और अपने पूर्व में निर्धारित विभिन्न स्थानों पर विराजित रहती है। इनकी डोली वर्तमान समय में खत सेली के दोहा गांव में है, जो सात मई को खत कोरु के कचटा मंदिर पहुंचेगी। खत कोरु के सदर स्याणा सुनील जोशी की अध्यक्षता और मन्दिर समिति के अध्यक्ष सीताराम चौहान के नेतृत्व में रविवार को कचटा मंदिर प्रांगण में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि चालदा महासू देवता के आगमन पर मांस व मदिरा का प्रचलन पूर्णतः बंद रहेगा। इसके बजाय श्रद्धालुओं को भंडारे के साथ घी वितरित किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों ने आठ कुंतल घी की व्यवस्था की है। मंदिर समिति के अध्यक्ष का कहना है कि हजारों श्रद्धालुओं के लिए घी में प्रसाद बनाया जाएगा और भंडारे के रूप में भी भरोसा जाएगा। जौनसार बावर की प्राचीन परंपराओं में शादियों व विभिन्न आयोजनों में घी देने का रिवाज रहा है। इसे सम्मान का प्रतीक माना जाता है। खत स्याणा सुनील जोशी ने कहा कि चालदा महाराज के दर्शन के दौरान शुद्ध भोजन व घी वितरण से श्रद्धा बढ़ेगी। बैठक में स्याणा अमर सिंह, अर्जुन सिंह राठौर, राजेंद्र जोशी, राजेंद्र सिंह चौहान, राजेंद्र शर्मा, सरदार सिंह चौहान, केशर सिंह चौहान, स्वराज सिंह चौहान, भारत चौहान, सूरत सिंह, श्याम सिंह राठौर, बारु सिंह, अर्जुन सिंह मेहता, विरेंद्र चौहान, केदार सिंह राठौर, भाव सिंह चौहान अजब सिंह चौहान, हाकम सिंह चौहान, पूरन सिंह खन्ना, लुदर सिंह, गंभीर चौहान और सतवीर चौहान आदि मौजूद रहे।
