Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • 2003 का नदीमर्ग कश्मीरी पंडित नरसंहार मामला फिर से खोलने का आदेश
  • जम्मू कश्मीर
  • राष्ट्रीय

2003 का नदीमर्ग कश्मीरी पंडित नरसंहार मामला फिर से खोलने का आदेश

RNS INDIA NEWS 02/09/2022
default featured image

श्रीनगर (आरएनएस)। केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा दायर एक आवेदन पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने नदीमर्ग नरसंहार मामले को फिर से खोलने का आदेश दिया है, जिसमें 23 मार्च, 2003 को पुलवामा जिले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा 24 कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा दायर आवेदन में एक दशक पहले एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करने और मामले को प्रभावी ढंग से बंद करने के एक पुराने आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने अब आदेश दिया है कि सुनवाई 15 सितंबर को फिर से शुरू होगी।
सेना की वर्दी में नकाबपोश लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने 23 मार्च, 2003 की रात को नदीमर्ग गांव में छापा मारा था, जहां 1990 के दशक की शुरुआत में लगभग 52 कश्मीरी पंडित रहते थे।
आतंकवादियों ने 11 पुरुषों, 11 महिलाओं और दो बच्चों को कतार में खड़ा कर उन पर स्वचालित गोलियों से बौछार की थी।
नरसंहार में शामिल कई आतंकवादी या तो मारे गए या बाद के वर्षो में पकड़ लिए गए।
जांच के बाद सात संदिग्धों को आरोपित किया गया था और मामला शोपियां सत्र अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था। मुकदमे के लंबित रहने के दौरान सबूतों और गवाहों की जांच की मांग वाली एक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया गया था।
अभियोजन पक्ष ने उस समय अपने आवेदन में कहा था कि गवाह घाटी से बाहर चले गए थे और डर के कारण अदालत में पेश होने से हिचक रहे थे।
निचली अदालत ने कहा था कि समीक्षा की अनुमति देना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने 21 दिसंबर, 2011 को पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद 2014 में नई अर्जी दाखिल की गई।
न्यायमूर्ति संजय धर ने अपने आदेश में कहा, पूर्वगामी कारणों से अभियोजन के आवेदन की अनुमति दी जाती है और इस अदालत द्वारा पारित आदेश दिनांक 21.12.2011 को वापस लिया जाता है। रजिस्ट्री को 15.09.2022 को पुनरीक्षण के लिए पुनरीक्षण याचिका पोस्ट करने का निर्देश दिया जाता है।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: पुलिस ने रेलवे नौकरी रैकेट गैंग का किया खुलासा, 5 गिरफ्तार
Next: पेपर लीक प्रकरण में एसटीएफ ने पॉलिटेक्निक कर्मचारी पकड़ा

Related Post

default featured image
  • राष्ट्रीय

गोलीबारी के बाद भीड़ ने दो हमलावरों को पीट-पीटकर मार डाला

RNS INDIA NEWS 25/11/2025 0
WhatsApp Image 2025-11-11 at 10.14.04
  • राष्ट्रीय

बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र का 89 वर्ष की आयु में निधन, सिनेमा जगत में शोक

RNS INDIA NEWS 24/11/2025 0
default featured image
  • राष्ट्रीय

ब्लैकमेलिंग से टूटकर 17 वर्षीय नाबालिग ने की खुदकुशी, आरोपी युवक पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज

RNS INDIA NEWS 23/11/2025 0

Your browser does not support the video tag.

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • पूर्वोत्तर राज्यों के कृषि विशेषज्ञों के लिए विवेकानंद पर्वतीय कृषि संस्थान में प्रशिक्षण संपन्न
  • विकास योजनाओं में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त: मुख्य विकास अधिकारी
  • शिक्षक संगठनों ने सड़क दुर्घटना में तीन पदाधिकारियों के निधन पर व्यक्त किया शोक
  • सड़क सुरक्षा पर समीक्षा बैठक आयोजित, अवैध पार्किंग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
  • जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की समीक्षा, लंबित कार्यों को तेजी से निपटाने के निर्देश
  • लम्बे समय से एक स्थान पर जमे सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदीकर्ता, कनिष्ठ सहायकों का डीएम ने किया स्थानान्तरण

Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.