Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • 10 साल तक रिलेशन में रहने के बाद महिला ने किया रेप केस, होईकोर्ट ने किया रद्द; जानें क्या था मामला
  • राष्ट्रीय

10 साल तक रिलेशन में रहने के बाद महिला ने किया रेप केस, होईकोर्ट ने किया रद्द; जानें क्या था मामला

RNS INDIA NEWS 09/07/2024
rns featured image new

भोपाल (आरएनएस)।  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महिला की शिकायत पर व्यक्ति के खिलाफ दर्ज बलात्कार के मामले को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि दोनों ‘अपनी मर्जी’ से 10 साल से अधिक समय से रिलेशनशिप में थे। जस्टिस संजय द्विवेदी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ये मामला कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होता है। कटनी जिले के एक महिला थाना पुलिस स्टेशन में उस व्यक्ति के खिलाफ नवंबर, 2021 में बलात्कार और अन्य आरोपों के लिए मामला दर्ज किया गया था। इसलिए राहत के लिए उसने हाई कोर्ट का रुख किया था।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, महिला और पुरुष शिक्षित हैं और 10 साल से अधिक समय से अपनी अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बना रहे थे। इसमें कहा गया है कि जब आदमी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया तो उनका रिश्ता टूट गया। इसका मतलब यह नहीं कि याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया जा सकता है। जस्टिस द्विवेदी ने कहा, मेरी राय में तथ्यात्मक परिस्थितियों के अनुसार, जैसा कि अभियोजक (महिला) ने अपनी शिकायत में और 164 सीआरपीसी के अपने बयान में बताया है, इस मामले को धारा 375 के तहत परिभाषित बलात्कार का मामला नहीं माना जा सकता है। आईपीसी और अभियोजन कुछ और नहीं बल्कि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होता है।
अदालत ने कहा, इस मामले में आईपीसी की धारा 366 (किसी महिला को शादी के लिए मजबूर करना) भी उस व्यक्ति के खिलाफ नहीं बनती है। इसलिए बाद के समय में याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज आईपीसी की धारा 366 के तहत अपराध भी रद्द किया जा सकता है।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: केदारनाथ जाने वाले यात्रियों की संख्या में आई और भी कमी
Next: डेढ़ लाख से अधिक की स्मैक के साथ युवक गिरफ्तार

Related Post

rns featured image new
  • राष्ट्रीय

अगले 48 घंटे में उत्तर प्रदेश पहुंचेगा मानसून, उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

RNS INDIA NEWS 26/06/2026 0
rns featured image new
  • राष्ट्रीय

दिल्ली हाई कोर्ट ने नीट परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध बरकरार रखा

RNS INDIA NEWS 19/06/2026 0
rns featured image new
  • राष्ट्रीय

भांजी से बात करने की खौफनाक सजा, मामाओं ने बीच सड़क पर युवक पर चढ़ा दी कार

RNS INDIA NEWS 13/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 28 जून
  • एटीएम कार्ड बदल एक लाख 45 हजार साफ
  • निहंग विवाद, यूकेडी नेता आशीष नेगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज, बयान से मचा बवाल, समर्थन में उतरे कई लोग
  • राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ ने मनाया हेलेन केलर का 147वां जन्मदिवस
  • गत्ता गोदाम में लगी आग, दमकल वाहनों ने पाया काबू
  • मानकों के अनुरूप व्यवस्था न मिलने पर कोचिंग संचालकों को नोटिस
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.