
अल्मोड़ा। स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक हस्तशिल्प और नवाचारों को कानूनी संरक्षण देकर उनकी बाजार में पहचान मजबूत करने के उद्देश्य से मानसखण्ड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा में स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए ‘बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) एवं भौगोलिक संकेतक (जीआई)’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मानसखण्ड विज्ञान केंद्र की सह प्रभारी डॉ. प्रियंका अधिकारी ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी दी। मुख्य वक्ता उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार भट्ट ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में किसी भी उत्पाद, तकनीक, ब्रांड या नवाचार की सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार किसी व्यक्ति या संस्था को उसकी बौद्धिक रचना पर कानूनी अधिकार प्रदान करते हैं, जिससे उसकी अनधिकृत नकल और व्यावसायिक दुरुपयोग को रोका जा सकता है। उन्होंने भौगोलिक संकेतक (जीआई) पर विशेष चर्चा करते हुए कहा कि यह किसी क्षेत्र विशेष से जुड़े उत्पाद की विशिष्ट पहचान और गुणवत्ता का प्रमाण होता है। उत्तराखंड के पारंपरिक कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प और स्थानीय वस्तुओं के लिए जीआई टैग आर्थिक रूप से काफी लाभदायक साबित हो सकता है। उन्होंने जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया, पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की भी जानकारी दी तथा स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों को अपने विशिष्ट उत्पादों के पंजीकरण के लिए आगे आने का आह्वान किया। व्याख्यान के दौरान पेटेंट और ट्रेडमार्क की अवधारणा को भी सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। कार्यक्रम में हवालबाग, मटेला, सुनौला, शीतलाखेत, कोसी सहित विभिन्न क्षेत्रों के स्वयं सहायता समूहों, उद्यमियों और विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों ने भाग लिया। कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागी ऑनलाइन भी जुड़े। विशेषज्ञों ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकारों की जानकारी स्थानीय उत्पादों और नवाचारों को नई पहचान देने के साथ उद्यमिता को भी मजबूती प्रदान करेगी।
