
विकासनगर(आरएनएस)। हरिपुर स्थित हरी घाट पर मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने को लेकर विवाद गहरा गया है। लोक पंचायत जमुना तीर्थ समिति ने कहा कि यदि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल 15 दिन के भीतर ब्रिटिशकालीन पुल को श्याम सेतु के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति शासन से प्राप्त कर लेते हैं तो समिति प्रतिमा को अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने पर विचार करेगी। निर्धारित अवधि में स्वीकृति नहीं मिलने पर समिति जौनसार-बावर की जनता के विचारों को शामिल कर प्रतिमा स्थापना का निर्णय लेगी। समिति ने प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ष 2016 से हरिपुर में घाटों के निर्माण और मां यमुना की प्रतिमा स्थापना के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2023 में यमुना घाट और यमुना कृष्ण धाम का शिलान्यास किया था। घाट निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। दूसरे चरण के कार्य के लिए भी प्रदेश सरकार से अनुरोध किया गया है। समिति के अनुसार, ब्रिटिशकालीन पुल के पिलर पर स्थापित की जाने वाली करीब ₹22 लाख की 21 फीट ऊंची प्रतिमा गुजरात के कारीगरों ने तैयार की है, जो अहमदाबाद से हरिपुर पहुंच चुकी है। अब स्थापना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।समिति ने बताया कि 25 जुलाई को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने प्रतिमा स्थापना के विरोध में हरिपुर पुल पर धरना दिया था। उन्होंने पुल को श्याम सेतु के रूप में विकसित करने की बात कही। लोक पंचायत ने उनके प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में यदि वह शासन से श्याम सेतु की सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त कर लेते हैं तो समिति प्रतिमा को अन्य स्थान पर स्थापित करने पर विचार करेगी। समिति ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में संबंधित विभागों से जानकारी ली गई, लेकिन श्याम सेतु निर्माण को लेकर शासन स्तर से अब तक कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। प्रेस वार्ता में लोक पंचायत के वरिष्ठ सदस्य चंद शर्मा, अनिल तोमर, जयपाल तोमर, पंडित शिवानंद उनियाल, रणवीर चौहान, सतपाल चौहान, प्रीतम चौहान, रणबीर तोमर, कांति चौहान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

