
देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बाल गहन चिकित्सा इकाई (पीकू) में गुरुवार देर रात बिजली और बैकअप सिस्टम फेल होने से बड़ा हादसा होते-होते टल गया। वेंटिलेटर बंद होने से गंभीर हालत में भर्ती 10 बच्चों की जान पर बन आई, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ ने करीब 10 मिनट तक एंबु बैग के जरिए मैन्युअल रूप से सांस देकर सभी बच्चों की जान बचा ली। घटना ने अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्थाओं और बैकअप सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 11:20 बजे ओटी इमरजेंसी भवन की बिजली अचानक गुल हो गई। इसके बाद पीकू वार्ड का यूपीएस भी बंद हो गया और बैकअप के लिए लगा जनरेटर तकनीकी खराबी के कारण चालू नहीं हो सका। बिजली जाते ही वार्ड अंधेरे में डूब गया और वेंटिलेटर सहित कई जीवनरक्षक उपकरण बंद हो गए। उस समय वार्ड में सात माह के शिशु सहित कई गंभीर रूप से बीमार बच्चे वेंटिलेटर पर थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार, पीजी चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल एंबु बैग की मदद से बच्चों को मैन्युअल वेंटिलेशन देना शुरू किया। करीब 10 मिनट बाद जनरेटर चालू होने पर बिजली आपूर्ति बहाल हुई और वेंटिलेटर दोबारा संचालित किए जा सके।
घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, पीकू वार्ड में लगे वेंटिलेटरों की बैटरियां पिछले लगभग एक वर्ष से खराब थीं। इन्हें बदलने और यूपीएस प्रणाली को दुरुस्त कराने के लिए संबंधित विभाग को कई बार पत्र भेजे गए थे, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
मामले की जानकारी मिलने पर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने चिकित्सा अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.एस. बिष्ट ने बताया कि अधिक लोड के कारण तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई थी। उन्होंने कहा कि यूपीएस की क्षमता बढ़ाने, बैकअप व्यवस्था मजबूत करने और वेंटिलेटरों की बैटरियां बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना ने सरकारी अस्पतालों की आपातकालीन तैयारियों और तकनीकी रखरखाव को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

