
उत्तरकाशी(आरएनएस)। जिले में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिले के सातों वन प्रभागों में वनाग्नि नियंत्रण के लिए कुल 143 फायर क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं। जिले में लगभग 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चीड वन फैले होने के कारण यह क्षेत्र वनाग्नि के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील है। जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने जिले में वनाग्नि नियंत्रण के लिए समुचित तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्थानीय जनसमुदाय की भागीदारी को भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंगलवार को जिला मुख्यालय में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि के प्रति संवेदनशील स्थानों पर एहतियाती उपाय पहले से सुनिश्चित किए जाएं। इसके लिए चीड़ वृक्षों की सघनता वाले क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों और आबादी के निकटवर्ती स्थानों से पिरूल हटाने और फायर लाईनों की सफाई जैसे कार्य प्राथमिकता से किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों और अन्य प्रमुख सड़कों पर वनाग्नि के नियंत्रण के लिए प्रत्येक डिवीजन में कम से कम एक फायर टेंडर की व्यवस्था की जाए। साथ ही, सड़कों से लगे इलाकों में वनाग्नि नियंत्रण हेतु त्वरित रिस्पांस के लिए मोबाईल टीमों का गठन भी किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन के स्तर से इन व्यवस्थाओं के लिए वन विभाग को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों से सटे वनों में गिरासू पेड़ों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाए और जनजीवन की सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरनाक पेड़ों को तुरंत हटाया जाए। कार्यशाला में प्रभागीय वनाधिकारी उत्तरकाशी वन प्रभाग, डीपी बलूनी ने बताया कि जिले में वनाग्नि की रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों और संगठनों के सहयोग से समग्र प्रयास किए जाने की रणनीति तैयार की गई है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी एसएल सेमवाल, प्रभागीय वनाधिकारी अपर यमुना वन प्रभाग रविन्द्र पुडीर, प्रभागीय वनाधिकारी भूमि संरक्षक गंगा बुडलाकोटी, उप निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क निधि सेमवाल, अपर जिलाधिकारी पीएल शाह, उप जिलाधिकारी देवानंद शर्मा, पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट सहित वन एवं अन्य विभागों के अधिकारी और पर्यावरण कार्यकर्ता दीपक सिंह जयाड़ा और योगेन्द्र सिंह बिष्ट ने भी भाग लिया।

