
अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए राज्यव्यापी जनसंवाद अभियान चलाने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को हुई पार्टी की बैठक में अभियान की तैयारियों पर चर्चा की गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य बनने के 26 वर्षों में सत्ता में रही सरकारों ने उत्तराखंड के हितों की अनदेखी की और प्राकृतिक संसाधनों की लूट को बढ़ावा दिया।
पार्टी के केंद्रीय संयोजक पीसी तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की मूल अवधारणा को साकार करने के लिए प्रदेश की ईमानदार और जनपक्षीय ताकतों को एकजुट होना होगा। उन्होंने दावा किया कि उपपा ही ऐसी क्षेत्रीय पार्टी है जिसने अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया है। उन्होंने जनता से पार्टी को समर्थन देने की अपील की।
तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड किसी एक राजनीतिक दल की देन नहीं है, बल्कि राज्य आंदोलन में जनता के संघर्ष और बलिदानों के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया। आरोप लगाया कि राज्य गठन के बाद सत्ता में रहे राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ा है और जल, जंगल व जमीन की कथित लूट से लोगों में असंतोष है।
बैठक में उपपा ने भाजपा सरकार पर प्रदेश की करीब सात हजार बीघा जमीन को पूंजीपतियों को कम कीमत पर देने की कोशिश करने का आरोप लगाया। पार्टी ने इस फैसले का विरोध करने की बात कही। उपपा के अनुसार इस मुद्दे को लेकर 15 सितंबर को राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा।
बैठक में पार्टी के उपाध्यक्ष एडवोकेट नारायण राम, महासचिव किरण आर्या, हीरा देवी, मुहम्मद शाकिब, धीरेन्द्र मोहन पंत, एडवोकेट गोपाल राम, एडवोकेट भारती, पार्वती थापा, अनीता नेगी, बलवंत नगरकोटी, पूजा थापा, भारती पांडे समेत अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।


