Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राज्य
  • उत्तराखंड
  • टिहरी
  • वनों से 7 हजार क्विंटल पिरूल का किया गया है संग्रहण
  • टिहरी

वनों से 7 हजार क्विंटल पिरूल का किया गया है संग्रहण

RNS INDIA NEWS 27/06/2025
rns featured image new

नई टिहरी(आरएनएस)।  वनों में आग का बड़ा कारण बने पिरूल के निस्तारण व व्यवसायिक उपयोग के लिए वन विभाग की नई टिहरी रेंज के तहत स्थापित पिरूल संग्रहण केंद्र में 7 हजार क्विंटल पिरूल का संग्रहण स्वयं सहायता समूहों की मदद से किया गया है। जिसमें से 60 क्विंटल पिरूल अब तक ब्रीकेट (कोयला) बनाने के लिए रिंगालगढ़ में स्थापित मशीन के लिए भेजा गया है। नई टिहरी रेंज के वनाधिकारी आशीष डिमरी ने बताया कि लगातार बारिश के कारण वनों में भले इस बार वनाग्नि की घटनायें टिहरी डिवीजन में न के बराबर रही है। लेकिन इसके बाद भी वन महकमे के आलाधिकारियों व शासन के निर्देशानुसार वनों में आग के बड़े कारण पिरूल के निस्तारण के लिए लगातार कार्यवाही जारी रखी गई है। जिसके तहत नई टिहरी रेंज के तहत स्थापित पिरूल संग्रहण केंद्र में अब तक इस बार 7 हजार क्विंटल का पिरूल एकत्र किया गया है। पिरूल एकत्रीकरण का कार्य सफलतापूर्वक स्वयं सहायता समूहों की मदद से किया गया है। स्वयं सहायता समूहों को पिरूल का प्रतिकिलो 10 रुपये वन विभाग की ओर से भुगतान किया जा रहा है। अब तक 60 क्विंटल पिरूल रिंगालगढ़ में ब्रीकेट बनाने की मशीन को उपलब्ध करवाया दिया गया है। जिससे पिरूल का व्यवसायिक उपयोग भी पायेगा। पिरूल से बने ब्रीकेट का कोयले के रूप में प्रयोग किया जायेगा। जिससे वनों पर आम लोगों की निर्भरता भी कम होगी और वनों को पर्याप्त संरक्षण भी होगा। डीएफओ पुनीत तोमर का कहना है कि डिवीजन के तहत पिरूल निस्तारण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जितना अधिक पिरूल का निस्तारण होगा। उतना ही वनों की आग से सुरक्षा पुख्ता हो पायेगी। पिरूल संग्रहल से स्वयं सहायता समूहों को भी लाभ मिलेगा।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: ‘पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा हेतु उन्नत कृषि तकनीकें’ विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
Next: कुमाऊं महोत्सव के छठे दिन लोकसंस्कृति की गूंज और कलात्मक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

Related Post

rns featured image new
  • टिहरी

मैती मिलन मेले में कलाकारों की प्रस्तुति ने बांधा समां

RNS INDIA NEWS 07/06/2026 0
rns featured image new
  • टिहरी

मुख्य सचिव के फ्लीट वाहन ने कार को मारी टक्कर, लोगों का हंगामा, चालक को गिरफ्तार करने की मांग

RNS INDIA NEWS 05/06/2026 0
rns featured image new
  • टिहरी

गजा क्षेत्र के गैस कनेक्शन ट्रांसफर करने की लगाई गुहार

RNS INDIA NEWS 02/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • मोहान-गनियाद्योली मोटर मार्ग के सुधारीकरण को मिली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति
  • खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को दी उन्नत खेती की जानकारी
  • खाद्य सुरक्षा मानकों पर होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को दिया प्रशिक्षण
  • गांजा तस्करी से खरीदी गई कार गैंगस्टर एक्ट में जब्त
  • हवालबाग में जल संरक्षण अभियान के तहत विशेष गोष्ठी आयोजित
  • रानीखेत पुलिस ने ₹1.67 लाख से भरा बैग कुछ ही घंटों में किया बरामद
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.