
अल्मोड़ा। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन ने शिक्षा विभाग से लंबित सुगम-दुर्गम नीति पर शीघ्र निर्णय लेने और सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया को बहाल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि दो वर्षों से नीति लंबित रहने के कारण हजारों शिक्षक और कार्मिक प्रभावित हो रहे हैं तथा उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार जोशी और जिला सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने जारी बयान में कहा कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया में केवल विभिन्न श्रेणियों (कैटेगरी) के आधार पर प्रदेशभर में दो हजार से अधिक स्थानांतरण किए गए हैं, जबकि सामान्य अनुरोध के आधार पर होने वाले स्थानांतरण न्यायालय में लंबित सुगम-दुर्गम नीति का हवाला देकर रोक दिए गए हैं। उनका कहना है कि न्यायालय ने अन्य आधारों पर स्थानांतरण करने से विभाग को नहीं रोका है, इसलिए सामान्य स्थानांतरण भी किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि विभाग को अपनी स्थानांतरण नीति की समीक्षा कर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। लगातार दूसरे वर्ष सामान्य स्थानांतरण प्रभावित होना कर्मचारियों के हितों के विपरीत है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2027 की स्थानांतरण प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से लागू की जाए ताकि सभी पात्र कार्मिकों और शिक्षकों को समान अवसर मिल सके।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण में 17(1)(ख) श्रेणी के प्रकरणों को प्राथमिकता नहीं दी गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इस पर विभाग से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की गई है।
संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया, उपाध्यक्ष महेश आर्य, संयुक्त मंत्री डी.के. जोशी, राजेंद्र सिंह लटवाल, कार्यालय सचिव गणेश भंडारी, संगठन मंत्री दीपक तिवारी, तारा सिंह बिष्ट, भगवत सिंह सतवाल, कोषाध्यक्ष संजय जोशी और ऑडिटर दीपशिखा मेलकन्या सहित अन्य पदाधिकारियों ने स्थानांतरण नीति को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की है।

