
नई टिहरी(आरएनएस)। सौंग बांध परियोजना से आंशिक रूप से प्रभावित ग्रामीणों ने प्रभावित परिवार को आवासीय भूखंड देने और ग्वाली डांडा चक और सोंगणा के प्रभावितों को विस्थापन की श्रेणी में रखने की मांग की है। उन्होंने डीएम को दिए ज्ञापन में कहा कि उनकी मांग जल्द पूरी न होने पर उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ग्रामीणों ने कहा कि बांध से कई परिवार आंशिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इससे उनके भवन, दुकान और पशुपालन व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। दिसंबर 2024 को गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में हुई समन्वय समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि बांध परियोजना से आंशिक रूप से प्रभावितों को प्रति परिवार 200 वर्गमीटर आवासीय भूखंड दिया जाएगा। इसके सापेक्ष डीएम ने 16 जून 2025 को सचिव सिंचाई के अनुमोदन के लिए पत्र भेजा था लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम ग्वाली डांडा चक सोंगणा के चार बांध प्रभावित परिवारों की 0.128 हेक्टेयर भूमि सड़क के लिए पीएमजीएसवाई के नाम कर दी गई थी। सड़क निर्माण के लिए ली गई जमीन को भी सौंग बांध परियोजना के लिए अर्जित की गई जमीन में शामिल किया जाना चाहिए जिससे उन्हें पूर्ण विस्थापन का दर्जा मिल सके। सौंग बांध प्रभावित एवं विस्थापित विकास समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने बताया कि 15 मार्च 2026 को ग्राम रगड़गांव में आयोजित बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था, कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र ही 200 वर्ग मीटर आवासीय भूखंड, आर्थिक मदद, प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने और भूमि संबंधी प्रकरण का समाधान शीघ्र करने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अभी तक उस पर कोई प्रगति नजर नहीं आ रही है। आवंटन की कार्यवाही जल्द शुरू नहीं की जाती है, तो प्रभावित परिवार आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। समिति के अध्यक्ष ने बताया कि डीएम नितिका खंडेलवाल ने शीघ्र ही सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया है।

