

ऋषिकेश(आरएनएस)। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि संस्कृति से जुड़ाव और नवाचार से उत्तराखंड के युवा आगे बढ़ेंगे। युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत हैं। यह बातें उन्होंने बुधवार को थानो के लेखक गांव में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महोत्सव को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान ‘युवा उत्तराखंड : नई सोच, नई चेतना’ विषय पर युवाओं की भूमिका, नवाचार, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव उत्तराखंड के विकास को नई दिशा दे सकता है। थानो स्थित लेखक गांव में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अल्मोड़ा के युवाओं की ओर से फ्लाइंग कार बनाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में तकनीकी नवाचार और नए प्रयोगों की अपार संभावनाएं हैं।स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाने चाहिए। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि उसकी विशिष्ट पहचान है। नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। केंद्रीय संस्कृत विवि नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी ने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि संस्कृति और पर्यावरण का संरक्षण भी होना चाहिए। साहित्य और संस्कृति भारतीय ज्ञान परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि उत्तराखंड में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय वनस्पतियों के क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने चिपको आंदोलन और गौरा देवी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही टिकाऊ विकास संभव है। लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि महोत्सव साहित्य, कला और संस्कृति के माध्यम से देश-विदेश के विचारों को जोड़ने का सशक्त मंच बन रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति के अवसर देने के साथ उनमें सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना है। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों और लगभग 60 देशों से जुड़े प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सत्र में साहित्यकारों, विद्वानों, युवा लेखकों और संस्कृति प्रेमियों ने भाग लिया।



