
देहरादून। मानसून के दौरान देहरादून के प्रमुख पर्यटन स्थल सहस्रधारा और मालदेवता पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र तो बने हुए हैं, लेकिन लापरवाही लगातार जानलेवा साबित हो रही है। अगस्त माह में इन दोनों क्षेत्रों में डूबने और तेज बहाव में बहने की तीन अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे हादसों ने संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों की सतर्कता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में ऊपरी इलाकों में होने वाली बारिश का असर कुछ ही समय में नीचे बहने वाली नदियों और नालों पर दिखाई देता है। सामान्य दिखने वाला जलस्तर अचानक उफान पर पहुंच जाता है, जिससे नदी किनारे बैठना, पानी में उतरना या फोटो और सेल्फी लेना बेहद खतरनाक हो जाता है।
अगस्त में सामने आए तीन मामलों में 2 अगस्त को रायपुर क्षेत्र में एक युवक दोस्तों के साथ घूमने के दौरान नदी में बह गया था। दो दिन तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद उसका शव बरामद हुआ। इसके बाद 9 अगस्त को मालदेवता में सांग नदी के पुल के पास एक व्यक्ति डूब गया, जिसका शव पुलिस और एसडीआरएफ ने खोज निकाला। वहीं 15 अगस्त को हरियाणा से घूमने आई एक युवती सहस्रधारा में फोटो खिंचवाते समय नदी के तेज बहाव में बह गई। रेस्क्यू अभियान के बाद उसका शव बरामद किया गया।
सहस्रधारा और मालदेवता क्षेत्र पहले भी बारिश के दौरान संवेदनशील साबित हो चुके हैं। भारी वर्षा के दौरान यहां जलस्तर तेजी से बढ़ने, रपटों पर पानी आने और नदी किनारों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में अतिवृष्टि के दौरान सहस्रधारा क्षेत्र अचानक आए सैलाब से भारी नुकसान झेल चुका है।
लगातार हो रहे हादसों के बीच प्रशासन और पुलिस ने संवेदनशील स्थलों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने और तेज बहाव के बीच फोटो या सेल्फी लेने से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। प्रशासन की सतर्कता के साथ पर्यटकों की जागरूकता भी ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है।

