
अयोध्या। रामलला के मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार आरोपी चोरी की रकम को केवल खर्च ही नहीं करते थे, बल्कि उसे वैध दिखाने के लिए शेयर बाजार में भी निवेश कर रहे थे। मामले में पुलिस ने आरोपियों के रिश्तेदारों और करीबियों के कई बैंक खातों को भी जांच के दायरे में लिया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी चोरी की नकदी सीधे अपने खातों में जमा करने के बजाय पहले रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों में जमा कराते थे। इसके बाद यह रकम अलग-अलग माध्यमों से उनके निजी खातों में स्थानांतरित की जाती थी, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। पुलिस ने इस मामले में करीब दो दर्जन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि चोरी किए गए सोने को किन सर्राफा कारोबारियों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि दानपात्रों की आधिकारिक गिनती शुरू होने से पहले ही आरोपी नोटों की गड्डियां निकाल लेते थे। पुलिस ने मुख्य आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की निशानदेही पर नकदी, सोने की चेन, मोबाइल फोन और एक लग्जरी कार बरामद की है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला जून 2026 में सामने आया था। अब तक पुलिस इस प्रकरण में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में मंदिर से जुड़े कर्मचारी, संविदाकर्मी, आउटसोर्सिंग कर्मचारी, एक निजी चालक, हाउसकीपिंग कर्मचारी, शिक्षक और सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क और चोरी की रकम के उपयोग की विस्तृत जांच कर रही है।

