Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • स्वास्थ्य
  • कोरोना
  • मानवीय फैसला
  • कोरोना
  • राजस्थान
  • राष्ट्रीय

मानवीय फैसला

RNS INDIA NEWS 24/09/2020
default featured image

हाल के दिनों में कई वीडियो वायरल हुए, जिसमें कोविड-19 के मरीज हृदयविदारक स्थितियों में नजर आए। एक तो लाइलाज महामारी, दूसरे चिकित्सा कर्मियों की खुद की जान की फिक्र में सुरक्षित दूरी और अपनों की पर्याप्त देखभाल के अभाव में मरीज करुण वेदना के साथ असहाय नजर आये। विडंबना यह कि परिजन कोविड-19 के प्रोटोकॉल के हिसाब से उनके पास रह भी नहीं सकते। अस्पताल के बाहर परिजनों के रोते-बिलखते चित्र और वीडियो सामने आये। ऐसे मुश्किल वक्त में अपनों का पास न होना दयनीय बना देता है। रोगियों की इस टीस और परिजनों की तीव्र अभिलाषा को देखते हुए राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग ने कोविड मरीजों के दर्द को बांटने की पहल की है। स्वास्थ्य विभाग ने परिजनों को इस शर्त के साथ अपने रोगी तक पहुंचने की अनुमति देने का फैसला किया कि वार्ड में प्रवेश करने से पहले तमाम सुरक्षात्मक उपायों का पालन करेंगे। मसलन वे मास्क, पीपीई किट और हाथ में दस्ताने पहनकर वार्ड में प्रवेश करेंगे। निस्संदेह यह राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग की सार्थक पहल है और पूरे देश में ऐसी संवेदनशील कोशिश करने की सख्त जरूरत है। मानवीय प्रवृत्ति होती है कि संकटकाल में जब अपने पास होते हैं तो आधे कष्ट खुद ही कम हो जाते हैं।?मरीज पर इसका सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। अपने प्रियजन की उपस्थिति और घर का बना कुछ खाने को मिल जाये तो रोगी इसे उपचार की तरह देखता है। निश्चित रूप से रोगी में इससे सुधार स्पष्ट तौर पर नजर भी आता है जिसे एक किस्म से उपचार प्रणाली का हिस्सा माना जा सकता है जो उन्हें तनाव व अवसाद से मुक्त करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। दरअसल, दुनिया से अलग-थलग व्यक्ति खुद ही बीमार नजर आने लगता है। निस्संदेह ऐसे प्रयासों की रोगियों के स्वस्थ होने में रचनात्मक भूमिका महसूस की जायेगी।
दरअसल, कोविड-19 प्रोटोकॉल की सख्ताई से तीमारदार अपने मरीजों को न मिल पाने की वजह से किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति में नजर आ रहे थे। उन्हें नहीं पता था कि अस्पताल में उनका परिजन किस हाल में है। कई दफा तो उन्हें आखिरी वक्त में उनके प्रिय का शव पीपीई किट में लिपटा मिलता था तो वे अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाते थे। एक अपराधबोध-सा उनके मन में रहता था कि काश वे ?अपने प्रियजन से आखिरी वक्त में दो बोल कह पाते। कई जगहों पर तो तीमारदारों की मांग पर वीडियो-कॉलिंग या किसी अन्य वर्चुअल माध्यम से मरीज से बात करने की कोशिश भी की गई, मगर आभासी माध्यमों में वास्तविक अहसास जैसा सुकून कहां मिल पाता है। निस्संदेह सख्त नियमों में ढील देना एक राहत की बात है। लोग अपने माता-पिता, भाई-बहन आदि से मुश्किल घड़ी में संवाद कायम कर पाएंगे। जिनकी स्थिति गंभीर है और बचने की संभावना नहीं है, उनके साथ बिताये गये अंतिम क्षण जीवन की यादगार पूंजी बन जाती है। निस्संदेह कोरोना की क्रूर महामारी ने हमारी संवेदनाओं को गहरे तक झकझोरा है और एक बड़ी आबादी को असहाय जैसी स्थिति में ला खड़ा कर दिया है। सत्ताधीशों को कोरोना संकट की तमाम वर्जनाओं के बीच इनसानी रिश्तों को संवेदनशील ढंग से देखना चाहिए। देश ने बहुत संयम और धैर्य से सरकार के कायदे-कानूनों का पालन किया है लेकिन ऐसी स्थिति में जब दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन के बावजूद संक्रमण के लिहाज से हम नंबर एक की ओर अग्रसर हैं, पीडि़तों व उनके परिजनों को किसी हद तक राहत देने की दिशा में कुछ और कदम उठाने चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि देश के तमाम हिस्सों से कोरोना संक्रमण से गहरे अवसाद में गये कई लोगों की आत्महत्या तक करने की खबरें आई हैं। बीमारी की त्रासदी, अपनों का पास न होना और उपचार का अभाव उन्हें तोड़ देता है। बहरहाल, जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, हमें महामारी के साथ जीने के लिये अनुकूल माहौल तो बनाना ही होगा। अन्य राज्य भी इस दिशा में पहल करें। कोशिश हो कि चिकित्सा कर्मियों की मुसीबतें भी न बढ़ें।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: जमींजोद हो चुके मकान के मलबे से मिला 25 तोला सोना
Next: देश में जल्द दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, सरकार ने खोला टेंडर

Related Post

default featured image
  • राष्ट्रीय

10 मिनट डिलीवरी के वादे पर सरकार ने लगाया ब्रेक, कंपनियों को विज्ञापनों से हटानी पड़ी समय सीमा

RNS INDIA NEWS 13/01/2026 0
default featured image
  • राष्ट्रीय

सगाई टूटने से नाराज युवक ने पूर्व मंगेतर की चाकू से हत्या की, दो आरोपी गिरफ्तार

RNS INDIA NEWS 10/01/2026 0
default featured image
  • राष्ट्रीय

सनसनीखेज खुलासा : इंसानों के ब्लड बैग में भरा मिला 1,000 लीटर जानवरों का खून, अधिकारी हैरान

RNS INDIA NEWS 09/01/2026 0

[display_rns_ad]

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 15 जनवरी
  • राज्य गठन के बाद बने फर्जी स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच करे सरकार
  • भारतीय गोरखाओं के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणी से आक्रोश
  • लाखों के जेवरात उड़ाने वाला आरोपी पांच घंटे में गिरफ्तार
  • राज्य आंदोलनकारियों को बीस हजार रूपए पेंशन की मांग
  • मकर संक्रांति पर सिमकनी नौले के आसपास चला स्वच्छता अभियान

Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.