
ऋषिकेश(आरएनएस। मनसा देवी रेलवे फाटक पर पत्थरबाजी में सीताराम रणाकोटी और लालमणि रतूड़ी पर साजिश का आरोप है। पुलिस ने सिर्फ इन दो लोगों को ही नहीं, बल्कि अन्य 16 लोगों को भी पत्थरबाजी मामले में मुख्य आरोपी बताया है। प्रकरण में 618 लोगों के खिलाफ बीएनएस की दस धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा भी शामिल है। मामले में सीताराम और लालमणि के अलावा छह लोग नामजद भी हैं, जिनमें से दो लोगों को पुलिस बीते रविवार को ही घटनास्थल से हिरासत में ले चुकी है। पत्थरबाजी प्रकरण में ऋषिकेश पुलिस की यह कार्रवाई कोतवाल कैलास चंद्र भट्ट की शिकायत पर की गई है। उन्होंने तहरीर में बताया कि वनभूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस सुरक्षा में तैनात थी। 28 दिसंबर को श्यामपुर में वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध हुआ। आक्रोशित लोगों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर समझाया गया। आरोप है कि आक्रोशित भीड़ की अगुवाई कर रहे सीताराम रणाकोटी, लालमणि रतूड़ी, योगेश डिमरी उर्फ आंवला न्यूज, विकास सेमवाल, जहांगीर आलम, गंगा प्रसाद सिमल्टी, पूजा पोखरियाल, राजेंद्र गैरोला और दस अज्ञात महिला-पुरुषों ने लगातार भीड़ को उकसाया। रोड और रेलवे ट्रैक जाम करने के लिए भड़काते हुए फेसबुक लाइव में भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की, जिससे भीड़ उग्र होकर नारेबाजी करते हुए न सिर्फ मरने-मारने पर उतारू हुई, बल्कि आक्रोशित लोग अभद्रता करते हुए नेशनल हाईवे और मनसा देवी में रेलवे ट्रैक पर ही बैठ गए। कोतवाल ने बताया कि इससे लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ। जाम में आपाताकालीन 108 सेवा भी बाधित हो गई। एम्बुलेंस में सवार मरीजों को बामुश्किल अन्य मार्गों से अस्पताल तक पहुंचाया गया। भीड़ को हटाने के प्रयास में सीताराम राणाकोटी व लालमणि रतूडी ने फिर से उन्हें भड़काकर साजिश के तहत रेलवे ट्रैक जाम किया। इससे छह ट्रेनों का आवागमन बाधित हो गया। रेलवे ट्रैक पर पड़े पत्थरों से जान से मारने की नीयत से पथराव किया। अफरा-तफरी में पुलिसकर्मी और जाम में फंसे लोगों की जान पर बन आई। बताया कि भीड़ से जहांगीर आलम और गंगा प्रसाद सिमल्टी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 500 से 600 अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।


