
देहरादून(आरएनएस)। टोंस वन प्रभाग के पुरोला में अवैध कटान के साथ ही विभागीय धन के गबन का मामला भी सामने आया है। वन विभाग की जांच में ये बात सामने आयी है कि जिन लाटों में लकड़ी काटे बिना निकासी की परमिशन मांगी गई थी, वहां कटान के नाम पर करीब 12 लाख रुपए के बिलों का फर्जी भुगतान भी दिखाया गया। इस खुलासे के बाद वन संरक्षक ने मामले की विजिलेंस जांच की सिफारिश शासन से की है। डीएफओ टोंस कुंदन कुमार की जांच में सामने आया था कि वन निगम के पुरोला डीएलएम की ओर से जिन 74 लाटों से लकड़ी निकासी की अनुमति मांगी गई थी। इनमें से कोटीगाड़ रेंज कें आंद्रेगाड़ बीट में 142 घन मीटर और 299 घन मीटर कटान भी शामिल था। लेकिन स्थलीय निरीक्षण में वहां किसी तरह का कटान सामने नहीं आया। जिसके बाद इस मामले में अनियमितता की कहकर डीएफओ ने वन निगम अधिकारियों व कर्मचारियों पर एफआईआर की संस्तुति की थी। लेकिन अब जांच में इससे भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जिन बीटों में कटान के बिना कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी वहां वन निगम की ओर से 12 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान करना दिखाया गया है। जो कि लकड़ी कटान व उससे जुड़े कामों के लिए किया। लेकिन वहां कटान हुआ ही नहीं।ऐसे में फर्जी बिल लगाकर विभागीय पैसों का गबन किया गया।
बिना कटान के निकासी वाले मामले में जांच आगे बढ़ी तो और भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। इन दोनों लॉटों में कटान के नाम पर 12 लाख रुपए से ज्यादा का फर्जी भुगतान दिखाया गया है। जिसके लिए फर्जी बिल बाउचर तक बनाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों पर एफआईआर और विजिलेंस जांच के लिए शासन को भेजा जा रहा है।
-विनय भार्गव,वन संरक्षक यमुना

