

विकासनगर(आरएनएस)। किशाऊ बांध परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों का आक्रोश रविवार को सड़कों पर दिखाई दिया। क्वानू-मैलोथ में किशाऊ बांध संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने सुबह 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक सड़क पर धरना देकर जाम लगाया। पांच घंटे तक चले प्रदर्शन में ग्रामीणों ने परियोजना के मौजूदा प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना था कि बांध निर्माण के नाम पर उनके पुश्तैनी गांव, उपजाऊ कृषि भूमि और सांस्कृतिक विरासत को डुबोने की तैयारी की जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित बांध से कई पारंपरिक गांव और खेती की जमीन प्रभावित होगी। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने घर, रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि पीढ़ियों से जिस जमीन पर उनका जीवन और आजीविका टिकी है, उसे जलमग्न करने से पहले उनकी सहमति और आपत्तियों को गंभीरता से क्यों नहीं सुना जा रहा है।
बांध के लिए वैकल्पिक स्थान की मांग: धरने के बाद किशाऊ बांध संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर परियोजना के निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। समिति ने बांध के लिए वैकल्पिक स्थान का सुझाव भी दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध का निर्माण जरूरी है तो इसे क्वानू से 10 से 12 किलोमीटर पीछे मीनस की ओर बनाया जाए। इससे मौजूदा प्रस्ताव से प्रभावित होने वाले गांवों, कृषि भूमि और परिवारों को विस्थापन से बचाया जा सकता है। उन्होंने इस विकल्प का तकनीकी और व्यावहारिक परीक्षण कराने की मांग की।
जल, जंगल और जमीन पर चिंता: समिति ने ज्ञापन में कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। जल, जंगल और जमीन के साथ स्थानीय पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली पर भी इसका असर पड़ेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय निवासियों के हितों और उनकी आपत्तियों को पर्याप्त महत्व दिए बिना परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है। समिति अध्यक्ष श्याम सिंह तोमर सहित पदाधिकारियों और क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर ऐसा समाधान निकालने की मांग की, जिसमें विकास के साथ स्थानीय लोगों के घर, जमीन और आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग: ग्रामीणों के धरने को देखते हुए तहसील प्रशासन ने कोटी-इच्छाड़ी-मीनस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से रवाना किया। हिमाचल प्रदेश जाने वाले वाहनों को त्यूणी से शिलाई भेजा गया, जबकि त्यूणी जाने वाले वाहनों को कालसी से हाजा-दसऊ होते हुए रवाना किया गया।



