


रुद्रप्रयाग(आरएनएस)। शारदीय नवरात्रि में सिद्धपीठ कालीमठ में सप्तमी, अष्टमी की रात्रि तथा नवमी के दिन लगने वाले मेले का परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ आयोजन हुआ। जिसमें भक्तों की भीड़ उमड़ी। सप्तमी के दिन लक्ष्मी मंदिर में भंडार से न्योजा-निशान पूजन की सामग्री पहुंची। इस अवसर पर आचार्यों, पुजारियों, ब्राह्मणों, कालीमठ के निवासियों और हक-हकूकधारियों ने विधिवत विशेष पूजन संपन्न की। अष्टमी की रात्रि को परंपरा के अनुसार ब्यूंखी के ग्रामीणों ने पुजारी एवं स्थानीय हकधारियों के साथ महाकाली मंदिर में स्थित महाकाली कूप को खोला और काली कूप की सफाई की। इस दौरान मंदिर परिसर की सभी बत्तियां एवं प्रकाश बुझा दिए गए। कूप के स्वच्छ हो जाने के उपरांत उसे सरस्वती नदी के जल से पुन भरा गया।
इसके पश्चात कालीमठ के निवासियों ने परंपरा के अनुसार मशालें तैयार कीं। पुजारी की अगुवाई में ढोल, नगाड़े, घंटे, भंकोरे आदि की ध्वनियाें के बीच काली माता के मंदिर समूहों की मशालों सहित परिक्रमा की गई। अंत में सभी मशालें सरस्वती नदी के तट पर रक्तबीज शिला पर फेंकी गईं। तब मां भगवती की चल विग्रह डोली ने मंदिरों की परिक्रमा की और कालीमठ के परिवारों ने अर्घ्य लगाया। इस अवसर पर कुंवर सिंह राणा ने मां भगवती की ओर से वचन बोले गए। ब्यूंखी के लोगों ने हकों का निर्वहन किया। नवमी तिथि को महाकाली पश्वा पर अवतरित हुई भक्तों को आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर नवयुवक मंगल दल अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राणा, क्षेत्रपाल के पश्वा राकेश राणा, मां भगवती के पुजारी सुरेशानंद गौड़, चंद्रप्रकाश गौड़, सुभाष चंद्र भट्ट, सतीश गौड़, शिवम ,कालीमाई पंचगाई समिति कालीमठ के अध्यक्ष लखपत सिंह राणा, प्रधान प्रदीप सिंह राणा, मठपति अब्बल सिंह राणा, दीपक असवाल, अंकित राणा, केदार सिंह राणा, देवेंद्र सिंह राणा सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।



