
श्रीनगर गढ़वाल। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन लेने के लिए फिंगर प्रिंट की बाध्यता ने गांवों में रह रहे बुजुर्गों की परेशानी बढ़ा दी है। परिवार के अन्य सदस्यों के रोजगार हेतु गांव से बाहर चले जाने के कारण अब अधिकांश परिवारों में बुजुर्ग की गांवों में हैं। पहले जब फिंगर प्रिंट की बाध्यता नहीं थी तो गांव के अन्य लोगों से बुजुर्ग अपने हिस्से की राशन मंगा देते थे, लेकिन अब राशन के लिए फिंगर प्रिंट लगाना जरूरी होने से वह राशन की दुकानों की दौड़ लगाने में असहाय हो रहे हैं। ग्राम पंचायत बरसोली के वरिष्ठ नागरिक नत्थीराम उनियाल का कहना है कि उनके गांव में कई बुजुर्ग हैं जो राशन की दुकान तक जाने में असमर्थ हैं। लेकिन राशन के लिए फिंगर प्रिंट जरूरी होने से वह सरकार की सस्ते राशन की सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। कहा ऐसे बुजुर्ग लोगों के परिवार के अन्य सदस्य जिनके राशन कार्ड में नाम हैं वह रोजगार की तलाश में गावों में बाहर हैं, जिससे उनका प्रत्येक महीने राशन के लिए आना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की इस परेशानी को देखते हुए सरकार को इसके लिए रास्ता निकालना जरूरी है। इधर, खाद्य पूर्ति अधिकारी कीर्तिनगर मलेथा ललित मोहन कठैत का कहना है कि हाल ही में डीएसओ टिहरी से इस बावत वार्ता हुई थी। जिसमें बुजुर्गों की यह परेशानी उठी थी। उन्होंने कहा कि जो लोग घर में नहीं हैं उनका नाम राशन कार्ड से हटने पर बुजुर्गों को ऑफलाइन राशन उपलब्ध कराई जा सकती है। अन्य विकल्पों पर भी विचार किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

