
बागेश्वर: उत्तराखंड के जंगलों को गर्मियों में झुलसा देने वाला पिरूल (चीड़ के पेड़ की सूखी पत्तियां) अब यहां विद्युत उत्पादन और रोजगार का प्रमुख जरिया बनने जा रहा है। जी हां, पिरूल योजना के तहत जल्द ही जिले में पिरूल से 150 किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा। इसके लिए पांच लोगों ने आवेदन किया है। जल्द ही यूनिट आदि तैयार कर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
पहाड़ में पिरूल जंगल की आग का प्रमुख कारण है। वनाग्नि रोकने के लिए अब पिरूल से विद्युत उत्पादन किया जाने की योजना बन रही है। बागेश्वर में चीड़ के जंगल को देखते हुए मुख्यमंत्री ने भी पिरूल यूनिट शुरू करने के निर्देश दिए थे। पिरूल योजना के तहत जिले में पांच लोगों ने आवेदन किया है। चार लोगों ने 25 किलोवाट व एक आवेदन 50 किलोवाट के लिए किया गया है। 25 किलोवाट वालों को 25 हजार व 50 केवी वाले आवेदनकर्ता को 50 हजार रुपया जमा करने होंगे। वन विभाग से एमओयू साइन होते ही यूनिट निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। गरुड़ व बागेश्वर में दो-दो और कपकोट में एक यूनिट लगाई जाएगी। पिरूल से ऊर्जा उत्पादन की इस प्रकार की पहली यूनिट होगी।
(रिपोर्ट मनीष नेगी)

