
देहरादून। क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोपी एवं विदेश फरार लवीश चौधरी उर्फ नवाब अली के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली, जिसके आदेश पर रायपुर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी, बड्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कृष्ण विहार, नथुवावाला निवासी अनूप सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर बताया कि करीब तीन वर्ष पहले मुजफ्फरनगर निवासी लवीश चौधरी ने सोशल मीडिया और सेमिनारों के जरिए लोगों को क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। आरोपी ने हर महीने पांच से छह प्रतिशत तक रिटर्न का भरोसा देकर बड़ी संख्या में लोगों का विश्वास जीता।
शिकायत के अनुसार आरोपी ने बोट ब्रो, यॉर्कर एफएक्स, टीएलसी कॉइन और माइन क्रिप्टो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का प्रचार कर देहरादून क्षेत्र के करीब 140 से 160 लोगों से निवेश कराया। शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को रिटर्न दिया गया, लेकिन बाद में जमा धनराशि निकालने की सुविधा बंद कर दी गई और आरोपी विदेश फरार हो गया। आरोप है कि इस तरीके से 12 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई।
पीड़ित का कहना है कि अक्टूबर 2025 से मई 2026 के बीच उन्होंने कई बार रायपुर थाना और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद बैंक लेनदेन, डिजिटल साक्ष्य और पीड़ितों की सूची के साथ न्यायालय में याचिका दायर की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच के आदेश दिए।
रायपुर थाना पुलिस ने अदालत के निर्देश पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी संजीत कुमार ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
देश के कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि लवीश चौधरी का नेटवर्क केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं था। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों में एजेंटों के माध्यम से निवेशकों को जोड़ा गया। गिरोह कथित तौर पर पॉन्जी स्कीम की तर्ज पर काम करता था। निवेशकों को महंगे होटलों में आयोजित सेमिनारों, आकर्षक रिटर्न और विदेशी यात्राओं का लालच देकर निवेश कराया जाता था। शुरुआती भुगतान के जरिए भरोसा जीतने के बाद करोड़ों रुपये की रकम लेकर नेटवर्क बंद कर दिया गया।

