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  • देहरादून

को‍विड सेंटर चलाने के लिए नहीं मिल रहे डॉक्टर

RNS INDIA NEWS 16/05/2021
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देहरादून। हम एक ओर तो कोविड से लड़ने के लिए पूरी तैयारी करने की बात सरकार कर तो रही है लेकिन अब राज्य के को‍विड सेंटर चलाने के लिए डाक्‍टर नहीं मिल रहे हैं। जी हां हल्‍द्वानी के मेडिकल कॉलेज ग्राउंड में डीआरडीओ द्वारा बनाए जा रहे 500 बेड के कोविड हॉस्पिटल के लिए डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। 10 दिन से चल रहे इंटरव्यू में अभी तक मात्र 5 डॉक्टर ही राजकीय मेडिकल कॉलेज को मिल पाए हैं। अस्पताल को चालू करने के लिए करीब 175 डॉक्टरों की जरूरत है। इसके अलावा 200 से ज्यादा पैरा मेडिकल स्टाफ की भी जरूरत होगी। अप्रैल में डीआरडीओ और देहरादून से आई उच्च अधिकारियों की टीम ने राजकीय मेडिकल कॉलेज में फेब्रिकेटेड कोविड अस्पताल के निर्माण को लेकर दौरा किया। अस्पताल में 100 ऑक्सीजन बेड, 125 आईसीयू बेड समेत 500 बेड के निर्माण की योजना है।
इस अस्पताल के लिए डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को दी गई। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने डॉक्टरों की भर्ती को लेकर विज्ञप्ति निकाली और 6 मई से इंटव्यू शुरू कर दिए, जो कि 31 मई तक चलेंगे। लेकिन, 10 दिन बीत जाने के बावजदू अभी तक मात्र 5 डॉक्टरों की भर्ती ही हो पायी है। इस अस्पताल को पूरी तरह से चालू करने के लिए करीब 175 डॉक्टर चाहिए। इसमें 7 प्रोफेसर, 13 एसोसिएट प्रोफेसर और 19 असिस्टेंट प्रोफेसर के अलावा जूनियर डॉक्टरों की जरूरत होगी। मगर यही स्थिति रही तो अस्पताल को शुरू करना मुश्किल हो जाएगा।

बीते दिनों सीएम तीरथ सिंह रावत ने डीआरडीओ द्वारा बनाए जा रहे इस फेब्रिकेटेड कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया था कि राज्य सरकार ने अस्पताल के निर्माण के लिए 40 करोड़ रुपये दिए हैं। उन्होंने कहा था कि 18 मई से इस अस्पताल को चालू कर दिया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल के लिए डॉक्टर ही नहीं मिलेंगे तो इसे समय से शुरू कैसे करेंगे।

500 बेड के नए कोविड अस्पताल के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज में 6 मई से डॉक्टरों के इंटरव्यू शुरू कर दिए गए हैं। अब तक 5 डॉक्टरों की भर्ती हो पायी है। अस्पताल के लिए डॉक्टर उपलब्ध कराने को स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा जा रहा है। पैरा मेडिकल स्टाफ उपलब्ध हो जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों का मिलना काफी मुश्किल हो रहा है। इस पूरे मामले को शासन-प्रशासन के सामने उठाया जाएगा।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी

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