
देहरादून। देश के प्रसिद्ध दंत रोग चिकित्सक एवं शिक्षाविद तथा राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग, भारत सरकार के डेंटल असेसमेंट एवं रेटिंग बोर्ड के पूर्णकालिक सदस्य और सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन के पिता डॉ. क्षेमेंद्र गुप्ता का एक अगस्त (शनिवार) को निधन हो गया। उनके निधन से चिकित्सा, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
उत्तर प्रदेश के हल्दौर, जिला बिजनौर के मूल निवासी डॉ. क्षेमेंद्र गुप्ता ने हल्दौर, बिजनौर और मेरठ में लंबे समय तक चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने चिकित्सा सेवा को केवल उपचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाजसेवा को भी अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। मोतियाबिंद उपचार और पोलियो उन्मूलन अभियान में उनका विशेष योगदान रहा। उन्होंने हजारों जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के साथ ही जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. गुप्ता शिक्षा और सामाजिक उत्थान के भी प्रबल समर्थक रहे। ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज, हरिद्वार के पूर्व छात्र रहे डॉ. गुप्ता सीडी इंटर कॉलेज हल्दौर और चंद्रमणि बाल विकास केंद्र, हल्दौर की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं आजीवन सदस्य रहे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
उनकी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पुत्रवधू डॉ. प्रीति विश्नोई ने नेत्र शिविरों के माध्यम से 10 हजार से अधिक निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए हैं। उनके कनिष्ठ पुत्र आशु ऐरन भी मेरठ में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। बड़ी पुत्रवधू डॉ. अनुभा अग्रवाल विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर चिकित्सा एवं समाजसेवा में योगदान दे रही हैं, जबकि कनिष्ठ पुत्रवधू मीनाक्षी ऐरन शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। डॉ. गुप्ता अपनी पत्नी सरोज ऐरन को पारिवारिक संघर्षों में साथ देने और सफलता की राह बनाने वाली अपनी प्रमुख प्रेरणा मानते थे।
जीवन के अंतिम समय में भी डॉ. गुप्ता ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए नेत्रदान किया। उनके नेत्रदान से जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी की उम्मीद जगी है। परिवार की ओर से भी नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य लगातार किया जा रहा है।
डॉ. गुप्ता का अंतिम संस्कार रविवार को ऋषिकेश स्थित पूर्णानंद श्मशान घाट, मुनि की रेती में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। चिकित्सा, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए शिक्षाविदों, चिकित्सकों, सामाजिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
