
हरिद्वार(आरएनएस)। चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड ने आंदोलन के तीसरे चरण में दर्जाधारी ओमप्रकाश जमदग्नि और मेयर किरन जैसल के माध्यम से मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेजा। कर्मचारियों ने पदोन्नति समेत विभिन्न मांगों का जल्द निस्तारण करने की मांग की। संघ ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर 21 अगस्त को आंदोलन के चौथे चरण में महानिदेशक कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, महामंत्री सुनील अधिकारी, प्रदेश संगठन सचिव दिनेश गुसाईं और विपिन नेगी, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश पंत तथा जिला मंत्री राकेश भंवर ने कहा कि कर्मचारी संघ शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहा है, लेकिन महानिदेशालय और शासन की ओर से मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन लगातार शासन को अवगत करा रहा है कि कर्मचारियों की पदोन्नति से सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की पदोन्नति, पौष्टिक आहार भत्ता, वर्दी भत्ता और धुलाई भत्ता समेत कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मांगों का समाधान नहीं होने से उनका उत्पीड़न और शोषण हो रहा है। संघ ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग की है। प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर, उप शाखा मंत्री ऋषिकुल अजय कुमार, अध्यक्ष गुरुकुल ताजबर सिंह, मनीष पंवार, संगठन सचिव नितिन कुमार और उपाध्यक्ष बाला देवी ने कहा कि शासनादेश जारी होने के बावजूद कर्मचारियों को अब तक वर्दी भत्ता वेतन में नहीं दिया गया है। वहीं, वर्षों से धुलाई भत्ते में भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग संवर्ग को पौष्टिक आहार भत्ता दिया जा रहा है, जबकि उनके साथ ड्यूटी करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लड़ी जा रही है। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की ओर से मांगों के समाधान का आश्वासन मिलने पर आंदोलन रोका जा सकता है। अन्यथा 21 अगस्त को महानिदेशक कार्यालय के बाहर नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। वार्ता के दौरान पदोन्नति, पौष्टिक आहार भत्ता, वर्दी भत्ता और धुलाई भत्ते की मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

