


अल्मोड़ा। अल्मोड़ा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) को राजभाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए ‘प्रशंसनीय श्रेणी’ के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मंगलवार को मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान यह सम्मान प्रदान किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि को अल्मोड़ा क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया गया है।
राष्ट्रीय मंच पर अल्मोड़ा नराकास का सम्मान
अल्मोड़ा नराकास के अध्यक्ष एवं भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत तथा सदस्य सचिव, मुख्य तकनीकी अधिकारी एवं प्रभारी राजभाषा अधिकारी रेनू सनवाल ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। उन्हें यह सम्मान सचिव, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार अंशुली आर्या तथा अन्य गणमान्यों द्वारा प्रदान किया गया।
32 केंद्रीय कार्यालयों और संस्थानों की भागीदारी
अल्मोड़ा नराकास के अंतर्गत अल्मोड़ा जिले के 32 केंद्रीय कार्यालय, उपक्रम, बैंक और सशस्त्र सीमा बल आदि संस्थान शामिल हैं। दूरस्थ क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद नराकास को राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान मिलना विशेष उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इसके लिए समिति के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, बैंकों और संस्थानों के विभागाध्यक्षों तथा राजभाषा अधिकारियों के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया गया है।
हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन में सामूहिक प्रयास
राजभाषा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप दैनिक कार्य-व्यवहार में हिंदी के सहज और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए नराकास से जुड़े सभी सदस्यों की निष्ठा और सतत प्रयासों को सराहनीय बताया गया है। समिति के अनुसार राष्ट्रीय पुरस्कार सामूहिक प्रयास, एकजुटता और राजभाषा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है।


