

देहरादून। उत्तराखंड में घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अब प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर कनेक्शन लेने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) और नेट मीटरिंग की कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए बिजली दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने नेशनल पोर्टल पर स्वीकार किए जाने वाले डिजिटल अनुबंध को कानूनी मान्यता दे दी है।
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की याचिका पर आयोग ने यह आदेश जारी किया है। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने स्पष्ट किया कि पीएम सूर्य घर नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के दौरान उपभोक्ता की ओर से डिजिटल रूप से स्वीकार की गई शर्तें ही उपभोक्ता और यूपीसीएल के बीच बाध्यकारी पीपीए मानी जाएंगी। इससे अलग से भौतिक एग्रीमेंट कराने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
आयोग ने उपभोक्ताओं को मीटर टेस्टिंग शुल्क के भुगतान में भी राहत दी है। योजना के तहत सिंगल फेज कनेक्शन के लिए 200 रुपये और थ्री-फेज कनेक्शन के लिए 300 रुपये मीटर टेस्टिंग शुल्क निर्धारित है। अब यह राशि आवेदन के समय नकद या अग्रिम रूप से जमा नहीं करनी होगी। रूफटॉप सोलर सिस्टम के ग्रिड से जुड़ने और सुचारू रूप से संचालित होने के बाद यह शुल्क उपभोक्ता के सामान्य बिजली बिल में जोड़कर वसूला जाएगा।
आयोग ने उपभोक्ताओं और ऊर्जा निगम के बीच बिजली के लेनदेन को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट की है। यदि उपभोक्ता की ओर से ग्रिड को भेजी गई बिजली उसकी खपत से अधिक होती है, तो यूपीसीएल नियमानुसार अतिरिक्त बिजली का भुगतान या समायोजन करेगा। इसके अलावा समय से पहले बिजली बिल का भुगतान करने पर सोलर उपभोक्ताओं को भी नियमानुसार अर्ली पेमेंट छूट का लाभ मिलेगा। मौजूदा बिजली मीटर को चेक मीटर के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि बिजली की खपत और ग्रिड को भेजी गई ऊर्जा का सही हिसाब रखा जा सके।
88,459 घरों में लग चुके हैं सोलर प्लांट
उत्तराखंड में पीएम सूर्य घर योजना के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में योजना के तहत अब तक 1,35,052 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 88,459 घरों की छतों पर कुल 318.90 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित कर चालू किए जा चुके हैं। डिजिटल अनुबंध को कानूनी मान्यता मिलने और कागजी प्रक्रिया आसान होने से राज्य में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।



