


हल्द्वानी(आरएनएस)। वाहनों में इस्तेमाल होने वाली अवैध हाई-इंटेंसिटी लाइटों के खिलाफ प्रशासन सख्त हो गया है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में जल्द ही एक सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की राज्य स्तरीय बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सड़क सुरक्षा को खतरे में डालने वाली अवैध और अत्यधिक तीव्र लाइटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। आरटीओ प्रवर्तन अरविंद पांडे ने बताया कि कमेटी के निर्देशों के क्रम में हल्द्वानी संभाग में परिवहन और यातायात पुलिस की संयुक्त टीमें रात के समय विशेष चेकिंग अभियान चलाएंगी। शहर में प्रवेश करने वाले भारी व्यावसायिक वाहनों, निजी कारों और दोपहिया वाहनों में लगी अवैध मॉडिफाइड लाइटों और अतिरिक्त बार-लाइट्स की बारीकी से जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर चालान के साथ अनधिकृत हटाई भी जाएंगीं।
तेज रोशनी से फ्लैश ब्लाइंडनेस का खतरा: बेस अस्पताल के ऑप्टोमेट्रिस्ट डॉ. महेंद्र सिंह अधिकारी, प्राथमिक चिकित्सालय बैलपड़ाव के डॉ. नीरज वार्ष्णेय, और बेस अस्पताल से सेवानिवृत्त नेत्र सर्जन डॉ. तारा दत्त रखोलिया ने बताया कि सामने से आने वाले वाहन की अत्यधिक तीव्र सफेद लाइट चालक की आंखों की पुतलियों को अचानक सिकोड़ देती है। इसका आंखों पर पड़ना रेटिना में मौजूद विजुअल पिगमेंट को अस्थायी रूप से डिस्चार्ज कर देता है, जिसे फ्लैश ब्लाइंडनेस या ट्रॉज़लर इफेक्ट कहा जाता है। इसके बाद भी आंख की सामान्य दृष्टि लौटने में लगभग 4 से 7 सेकंड का समय लगता है। यदि कोई वाहन 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा हो, तो इन सेकंडों में करीब 70 से 80 मीटर की दूरी बिना कुछ देखे तय कर लेता है। इस हादसे का खतरा रहता है।
वाहनों की लाइटों के वैज्ञानिक मानक: अशोका लीलैंड, रुद्रपुर से सेवानिवृत्त ऑटोमोबाइल इंजीनियर और विशेषज्ञ निपुण कर्नाटक ने बताया कि वाहनों में हेडलाइट्स का रंग और तीव्रता वैज्ञानिक मानकों पर आधारित होती है। सामान्य हैलोजन लाइटें गर्म पीली रोशनी देती हैं, जो कोहरे, बारिश और धुंध में बिखरती नहीं हैं। वहीं बाजार में बिकने वाली अवैध एलईडी व एचआईडी लाइटें कूल व्हाइट या नीली होती हैं, जिनकी तीव्रता 6 हजार केल्विन तक होती है। ये आंखों में गंभीर चकाचौंध पैदा करती हैं।
अवैध मॉडिफिकेशन पर जुर्माना: आरटीओ अरविंद पांडे ने बताया कि वाहनों की मूल बनावट या लाइटिंग में अनधिकृत बदलाव करना पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसी लाइट बेचने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। अवैध मॉडिफिकेशन करने पर वाहन मालिक पर ₹5000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।



