


हल्द्वानी(आरएनएस)। उत्तराखंड जल संस्थान में विगत 20 से 25 वर्षों से कार्यरत संविदा श्रमिकों का विभागीय प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरना जारी है। संविदा श्रमिक संघ का कहना है कि 26 मई 2026 को अधिशासी अभियंता और अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक किसी मांग पर अमल नहीं किया गया। कर्मचारियों के अनुसा, द्विपक्षीय वार्ता में तय हुआ था कि दस वर्ष से अधिक सेवा पूरी कर चुके श्रमिकों को कुशल श्रेणी में और पांच वर्ष से अधिक सेवा वाले श्रमिकों को अर्द्धकुशल श्रेणी में परिवर्तित करने की कार्यवाही होगी।कुशल श्रेणी के कर्मियों को अतिकुशल में बदलने और श्रम विभाग द्वारा 01 अप्रैल 2026 से लागू न्यूनतम वेतन वृद्धि शासनादेश को प्रभावी करने का प्रस्ताव 15 अगस्त तक उच्चाधिकारियों को भेजा जाना था। प्रत्येक माह की 10 तारीख तक वेतन भुगतान कराने, दमुवाढूंगा के लाइनमैन जयन्त आर्या के सात माह के रुके वेतन का निस्तारण करने और 1965 के बोनस अधिनियम के तहत 8.33 प्रतिशत बोनस पर प्रस्ताव तैयार करने पर भी सहमति जताई गई थी। श्रमिक नेताओं का स्पष्ट कहना है कि भीषण महंगाई के दौर में महज 10 से 12 हजार रुपये के अल्प मानदेय पर काम करने के बावजूद समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। धरना स्थल पर शाखा अध्यक्ष महेश चन्द्र, सचिव पवन कुमार, कोषाध्यक्ष महेश चन्द्र, मण्डलीय संरक्षक गोविन्द आर्या, प्रान्तीय कोषाध्यक्ष श्याम सिंह, पूर्व महामंत्री गिरीश चन्द्र समेत महेन्द्र सैनी, प्रकाश चन्द्र, हरीश चन्द्र व जयन्त आर्या डटे रहे।

