
अल्मोड़ा। मानसखंड विज्ञान केंद्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति के अंतर्गत “उत्तराखंड में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मीडिया की भूमिका” विषय पर पैनल चर्चा एवं पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों ने विज्ञान संचार को अधिक प्रभावी बनाने तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी विभागों, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
पत्रकार वार्ता में मानसखंड विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. नवीन चन्द्र जोशी ने केंद्र की दो वर्षों की उपलब्धियों और यूकॉस्ट की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (यूएसटीआई) नीति 9 जून 2026 को जारी की गई थी, जिसका उद्देश्य विज्ञान एवं तकनीकी संसाधनों का उपयोग समाज के व्यापक हित में करना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में यूकॉस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका है और राज्य की वैज्ञानिक क्षमताओं को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डॉ. जोशी ने बताया कि मानसखंड विज्ञान केंद्र में आयोजित होने वाले आगामी संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. जी.सी.एस. नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में विज्ञान, नवाचार और स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देकर सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में उपलब्ध पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय प्रतिभाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़कर रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
भूगोल वैज्ञानिक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जे.एस. रावत ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों पर इसके दुष्प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान और जनजागरूकता को समय की आवश्यकता बताया।
मानसखंड विज्ञान केंद्र की सह-प्रभारी डॉ. प्रियंका अधिकारी ने कहा कि विज्ञान एवं नवाचार का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उसके लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें। उन्होंने स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित पैनल चर्चा में पत्रकारों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और स्थानीय नवाचारों से जुड़े विषयों को मीडिया में अधिक प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैज्ञानिक विषयों को सरल और जनसुलभ भाषा में प्रस्तुत करने पर जोर देते हुए वैज्ञानिक संस्थानों और मीडिया के बीच नियमित संवाद की आवश्यकता भी रेखांकित की।
पैनल चर्चा की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पांडेय ने की, जबकि एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. जी.सी.एस. नेगी ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में पत्रकारों और वैज्ञानिकों ने विज्ञान पत्रकारिता को सशक्त बनाने, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु स्थापित करने तथा स्थानीय नवाचारों को व्यापक मंच उपलब्ध कराने संबंधी कई महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए।



