
देहरादून। साइबर ठगों ने एनआईए चीफ और पुलिस अधिकारी बनकर 71 वर्षीय कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते हुए 35.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। मनी लॉन्ड्रिंग और दिल्ली बम धमाके के मामले में फंसाने की धमकी देकर कई दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और आरबीआई के कथित विशेष खाते में रकम जमा कराने के नाम पर पूरी राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली। मामले में बुधवार को साइबर अपराध पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।
पंडितवाड़ी निवासी राजेंद्र प्रसाद, जो आदित्य डिपार्टमेंटल स्टोर संचालित करते हैं, को तीन अगस्त की शाम एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को देहरादून पुलिस मुख्यालय का इंस्पेक्टर बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और एनआईए चीफ उनसे बात करना चाहते हैं। इसके बाद दूसरे व्यक्ति ने खुद को एनआईए का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग, दिल्ली बम धमाके में संलिप्तता और दो करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण डिफॉल्ट का हवाला देकर गैर-जमानती वारंट जारी होने की बात कही।
ठगों ने भरोसा दिलाने के लिए व्हाट्सएप वीडियो कॉल का सहारा लिया। वीडियो कॉल में एक व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी में दिखाई दिया, जिसके पीछे एनआईए का प्रतीक चिन्ह और अशोक चक्र लगा था। जालसाजों ने पीड़ित को किसी से भी इस बारे में चर्चा न करने की चेतावनी देते हुए कई दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए कथित रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा।
ठगों ने दावा किया कि जांच पूरी होने तक उनकी पूरी धनराशि आरबीआई के विशेष खाते में जमा करानी होगी और जांच समाप्त होने पर ब्याज सहित वापस कर दी जाएगी। इस झांसे में आकर राजेंद्र प्रसाद ने पांच अगस्त को अपने बैंक खाते से 8.50 लाख रुपये जम्मू स्थित एक खाते में और 11 अगस्त को पोस्ट ऑफिस की एफडी तुड़वाकर 27 लाख रुपये लखनऊ स्थित एक निजी कंपनी के खाते में जमा करा दिए।
रकम मिलने के बाद ठगों ने जांच पूरी होने पर संपर्क करने की बात कही, लेकिन बाद में उनके सभी नंबर बंद मिले। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर साइबर ठगों की पहचान और धनराशि के ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है।

