
चमोली(आरएनएस)। तमक नाले में सोमवार को जिस सैलाब में बैली ब्रिज बहा वह सिर्फ दो मिनट का था लेकिन नाले में ढलान होने के कारण पानी का वेग इतना अधिक था कि पुल घास के तिनकों की तरह उछल गया। सोमवार को यह नाला तीन बार उफान पर आया और दूसरे उफान में ही बैली ब्रिज बह गया। वहीं जेसीबी ऑपरेटर ने संयम बरतकर खुद को बचाया। तमक नाले में अक्सर पानी कुछ मिनट के लिए आता है लेकिन उसका वेग इतना अधिक होता है कि आसपास सबकुछ बहा ले जाता है। सोमवार दोपहर के समय तमक नाला उफान पर आया। उस वक्त पानी पुल तक तो पहुंचा लेकिन पुल सुरक्षित रहा। इस दौरान भारी मलबा नदी की तलहटी पर जमा हो गया जिससे नदी का स्तर उठ गया। पुल पर आए मिट्टी पत्थरों को हटाकर आवाजाही सुचारु करवा दी गई लेकिन शाम करीब चार बजे फिर यह नाला उफान पर आ गया और पुल के साथ एक-एक छोटा मालवाहक वाहन उसमें बह गया। इसी दौरान एक जेसीबी भी नदी किनारे कुछ काम कर रही थी। जेसीबी भी पानी के सैलाब में बहने लगी लेकिन जेसीबी ऑपरेटर जोगेंद्र सिंह ने संयम धैर्य का परिचय दिया और खुद को सैलाब में बहने से बचा लिया। जोगेंद्र ने बताया कि जब अचानक पानी बढ़ गया तो मेरे मन में यही विचार आया कि यदि नीचे उतरता हूं तो पानी में बह जाऊंगा। इसलिए मैं जेसीबी में ही बैठा रहा। करीब दो मिनट बाद पानी कम होने लगा तो मैं सुरक्षित निकल गया। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि सड़क पर पानी के साथ बोल्डर भी बह रहे थे। मंजर तो खौफनाक था मगर अब मेरे मन में कोई डर नहीं है। मैं आज फिर जेसीबी लेकर रास्ता खोलने के लिए पहुंच गया हूं।
रात को फिर बढ़ा पानी, वाहन हो गया लापता: सोमवार को जो कैंपर वाहन बह गया था वह नीचे नदी में दिखाई दे रहा था। मगर रात को एक बार यह नाला फिर उफान पर आ गया। इसके बाद कैंपर वाहन का कुछ अता-पता नहीं चल रहा है।
