
विकासनगर(आरएनएस)। बहुउद्देशीय किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड, विकासनगर में वर्ष 2015 से मार्च 2020 के बीच हुए 3 करोड़ 43 लाख 85 हजार 671 रुपये के गबन और दस्तावेजों में कूटरचना के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विकासनगर की अदालत ने आरोपी भारती देवी को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी महिला को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामले के अनुसार बहुउद्देशीय किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड, विकासनगर में एक अप्रैल 2015 से मार्च 2020 तक पांच वर्षों का लेखा परीक्षण कराया गया था। लेखा परीक्षण में गबन का मामला सामने आने के बाद निबंधक सहकारी समितियां उत्तराखंड की ओर से जांच कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी की रिपोर्ट में 3,43,85,671 रुपये के गबन के साथ ही कर्मचारियों की ओर से दस्तावेजों में कूटरचना कर अभिलेख तैयार किए जाने की बात सामने आई। जांच में प्रथम दृष्टया भारती देवी की संलिप्तता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां, देहरादून के कार्यालय की ओर से सात सितंबर 2020 को भारती देवी के खिलाफ धन के गबन और दस्तावेजों में कूटरचना के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इसके बाद कोतवाली विकासनगर धोखाधडी सहित विभिन्न धराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों में खाताधारकों के आहरण-वितरण फॉर्म में अंकों की हेराफेरी, बैंक से रकम निकालने के बाद रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं करने अथवा बाद में प्रविष्टि करने, फर्जी हस्ताक्षर करने और कूटरचित दस्तावेजों को वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने जैसे तथ्य सामने आए। अदालत ने साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद माना कि भारती देवी के सभी आरोप संदेह से परे साबित हुए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने फैसला सुनाते हुए भारती देवी सात वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना अदा न करने पर संबंधित धाराओं के तहत अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

