
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों की पवित्रता और धार्मिक भावनाओं के संरक्षण को लेकर सोमवार को अधिवक्ता विनोद चंद्र तिवारी ने प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार से कानून बनाने की मांग उठाई। इस दौरान उन्होंने ‘उत्तराखंड धार्मिक स्थल मर्यादा संरक्षण अधिनियम, 2026’ का प्रस्तावित मसौदा भी सार्वजनिक किया। प्रस्तावित अधिनियम का उद्देश्य मंदिरों, तीर्थस्थलों, मठों, आश्रमों, पवित्र नदियों, धार्मिक प्रतीकों, ग्रंथों और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों की मर्यादा एवं गरिमा की रक्षा के लिए संतुलित और संवैधानिक व्यवस्था तैयार करना है। मसौदे में धार्मिक स्थलों पर अशोभनीय गतिविधियों, धार्मिक प्रतीकों एवं ग्रंथों के अनुचित या अपमानजनक उपयोग, अनुचित प्रदर्शन और विज्ञापन पर नियंत्रण से जुड़े प्रावधान सुझाए गए हैं। इसके अलावा धार्मिक परिसरों के लिए आचार-संहिता, डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से जुड़ी गतिविधियों तथा धार्मिक स्थलों की व्यवस्था और मर्यादा बनाए रखने के लिए संस्थागत व्यवस्था का भी प्रस्ताव किया गया है। अधिवक्ता तिवारी ने स्पष्ट किया कि यह वर्तमान में लागू कानून नहीं, बल्कि एक प्रस्तावित मसौदा है। इसे विधिक परीक्षण, विशेषज्ञ विमर्श, सार्वजनिक सुझाव और आवश्यक विधायी प्रक्रिया के लिए तैयार किया गया है। मसौदा तैयार करने में अधिवक्ता हिमांशु जोशी, अधिवक्ता प्रभाकर जोशी, वरिष्ठ अधिवक्ता, अधिवक्ता भूपेश सिंह बिष्ट, नीमा, गोविंद प्रसाद और शिक्षाविद अजय जोशी ने विधिक एवं शैक्षिक सुझाव दिए। प्रेस वार्ता में प्रस्तावित कानून की आवश्यकता, प्रमुख प्रावधानों, संवैधानिक पहलुओं और उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर चर्चा की गई। इस अवसर पर सुशील शाह, दिनेश जोशी, विनय किरोला, नीमा आर्य समेत कई लोग मौजूद रहे।
