
भुवनेश्वर। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच भाजपा नेता और संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से अपने इस्तीफे पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी। भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘जेन जी’ को गुमराह करने की कोशिश की गई थी और इस पूरे विवाद में उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके लिए मंत्री पद महत्वपूर्ण नहीं था।
प्रधान ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क कर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफे की पेशकश की थी। इसके बाद उन्होंने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
रायराखोल में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजद कार्यकर्ताओं के विरोध और ‘वापस जाओ’ के नारों से उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और विरोध के बावजूद ओडिशा की जनता के बीच आते रहेंगे।
प्रधान ने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक ने उनके खिलाफ प्रदर्शन में युवाओं को शामिल किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा काम नहीं किया जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा होना पड़े। उनका कहना था कि भले ही वह राज्य का नाम रोशन न कर पाए हों, लेकिन ऐसा कोई काम भी नहीं किया जिससे राज्य की बदनामी हो।
प्रधान ने कहा कि भगवान जगन्नाथ और मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से वह करीब 12 साल पहले केंद्रीय मंत्री बने थे। बीजद के विरोध को देखते हुए उन्होंने विधानसभा में उपनेता प्रसन्ना आचार्य से कार्यक्रम में आने को लेकर सलाह ली थी। उनके अनुसार प्रसन्ना आचार्य ने कार्यक्रम में आने और स्वागत का भरोसा दिया, जिसके बाद वह वहां पहुंचे।

