
रुड़की(आरएनएस)। सावन मास की शिवरात्रि को लेकर शिवभक्तों में खासा उत्साह है। मंगलवार, 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के अवसर पर क्षेत्र के शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़िये भी निर्धारित शुभ समय में शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेंगे। शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री ने बताया कि 11 अगस्त को चतुर्दशी तिथि शाम करीब 4:54 बजे से शुरू होगी। शिवरात्रि पर प्रदोष काल से भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु शाम से भगवान शिव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि रात्रि में शिव पूजा के लिए निशीथ काल को विशेष माना जाता है, जो मध्यरात्रि के आसपास रहेगा।
गंगाजल का अभिषेक: सावन शिवरात्रि पर गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करना बेहद पुण्यकारी माना गया है। जलाभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान शिव का ध्यान करते हुए ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। कांवड़िये अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार शिवालयों में जल अर्पित कर सकते हैं।
विशेष फलदायी पूजा: हालांकि प्रदोष काल से निशीथ काल तक भगवान शिव की पूजा को विशेष फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि पर सच्चे मन और श्रद्धा से की गई आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। सावन शिवरात्रि को लेकर मंदिरों में भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंगलवार को शिवालयों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजेंगे। कांवड़िये गंगाजल चढ़ाकर अपनी कांवड़ यात्रा पूरी करेंगे, जबकि स्थानीय श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे।
