
देहरादून। साइबर अपराधों और फर्जी सिम कार्ड के जरिए हो रही ऑनलाइन ठगी पर रोक लगाने के लिए उत्तराखंड पुलिस और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने संयुक्त रणनीति तैयार की है। गुरुवार को एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) वी. मुरुगेशन की अध्यक्षता में आयोजित समन्वय बैठक में दोनों विभागों के अधिकारियों ने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए तकनीकी समन्वय बढ़ाने और फर्जी सिम कार्ड पर प्रभावी कार्रवाई करने पर जोर दिया।
बैठक में फर्जी और अनियमित सिम एक्टिवेशन पर रोक लगाने, तकनीकी सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान तथा नीतिगत सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों का कहना था कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस और दूरसंचार विभाग के बीच बेहतर तकनीकी समन्वय जरूरी है।
बैठक में संचार साथी पोर्टल के अधिकाधिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से कोई भी नागरिक यह जानकारी प्राप्त कर सकता है कि उसकी पहचान पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। यदि कोई नंबर फर्जी या संदिग्ध पाया जाता है तो उसकी शिकायत दर्ज कर उसे बंद कराने का अनुरोध भी किया जा सकता है।
बैठक में मोबाइल चोरी या गुम होने की स्थिति में सीईआईआर (CEIR) सुविधा के उपयोग की भी जानकारी दी गई। इसके जरिए चोरी या खोए हुए मोबाइल को ब्लॉक किया जा सकता है, जिससे उसका दुरुपयोग नहीं हो सके। मोबाइल मिलने पर उसे दोबारा अनब्लॉक भी कराया जा सकता है।
इसके अलावा पोर्टल के ‘चक्षु’ फीचर के माध्यम से संदिग्ध कॉल, एसएमएस और व्हाट्सएप संदेशों की शिकायत दर्ज की जा सकती है। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी केवाईसी, बैंक या पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने, पार्सल अथवा लॉटरी के नाम पर होने वाली साइबर ठगी की शिकायत भी इस प्लेटफॉर्म पर तत्काल की जा सकती है।
बैठक के अंत में एडीजी वी. मुरुगेशन ने निर्देश दिए कि इन ऑनलाइन सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक इनका लाभ उठा सके और साइबर ठगी से सुरक्षित रह सके। बैठक में आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरने, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह, एएसपी लोकजीत सिंह, एएसपी शांतनु पाराशर सहित दूरसंचार विभाग के उप महानिदेशक राजीव बंसल, आदित्य सिंह, निदेशक लवी गुप्ता और एडीजी (सुरक्षा) मुदिता चंद्रा मौजूद रहे।
