
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में 25 किसानों ने लिया प्रशिक्षण, कृषि उद्यमिता और आय बढ़ाने पर दिया जोर
अल्मोड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर की ओर से अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत श्रीअन्न (मिलेट्स) आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के कौशल विकास पर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। 14 से 21 सितंबर तक चले प्रशिक्षण में 25 किसानों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को मंडुवा आधारित उत्पाद तैयार करने, उनका मूल्यवर्धन करने और इन्हें आय सृजन के साधन के रूप में विकसित करने की जानकारी देना रहा।
मंडुवा से उत्पाद तैयार करने का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण की समन्वयक संस्कृति सिंह ने किसानों को मंडुवा से तैयार होने वाले विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों, इसकी पोषण क्षमता और दैनिक आहार में इसके महत्व की जानकारी दी। विशेष प्रशिक्षक चंपा देवी ने किसानों को मंडुवा से लड्डू, पापड़, केक और मफिन आदि तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। किसानों को उत्पाद निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और उपकरणों की जानकारी भी दी गई।
किसानों को भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग, अल्मोड़ा की प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण कराया गया। निधि सिंह ने उत्पादों को बाजार में बिक्री के लिए तैयार करने, पैकेजिंग और लेबल लगाने की प्रक्रिया का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
फल-सब्जी उत्पादन और पशुपालन की भी जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु के अनुरूप फलदार पौधों और मौसमी सब्जियों के चयन, वैज्ञानिक प्रबंधन तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने मंडुवा के उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों से प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को व्यवहार में अपनाने और मंडुवा आधारित छोटे कृषि उद्यम विकसित करने का आह्वान किया।
विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. एन.के. सिंह ने पशुपालन से संबंधित जानकारी देते हुए पशुओं के उचित प्रबंधन, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर किसानों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने आवश्यक कीटनाशक और कृमिनाशक दवाओं के उपयोग के संबंध में भी जानकारी दी।
मंडुवा के मूल्यवर्धन से आय बढ़ाने पर जोर
समापन अवसर पर जिला विकास अधिकारी संगीता आर्या ने प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मंडुवा पर्वतीय क्षेत्रों की प्रमुख पारंपरिक फसल होने के साथ पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने किसानों को मंडुवा के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की दिशा में आगे बढ़कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. कमल कुमार पांडे ने रखा। प्रशिक्षण में ग्राम उडेरखानी, भट्टखोला, जाठा, ओखलीसिरोद और करासीबुंगा के 25 किसानों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नीरज जोशी, डॉ. राजेश कुमार, महेश सिंह, सौरभ सिंह, बहादुर सिंह और राजन सिंह ने सहयोग किया।
जलवायु अनुकूल कृषि पर नया प्रशिक्षण शुरू
इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर की ओर से अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत अनुसूचित जाति के किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने के लिए जलवायु अनुकूल एकीकृत कृषि प्रणालियों और कृषि उद्यमिता पर एक अन्य सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी 21 सितंबर से शुरू किया गया है। यह प्रशिक्षण 27 सितंबर तक चलेगा। इसमें किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि पद्धतियों, एकीकृत कृषि प्रणाली, कृषि उद्यमिता तथा आय और आजीविका के विभिन्न अवसरों से जुड़ी व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को कौशल विकास, मूल्यवर्धन, कृषि उद्यमिता और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करना तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर विकसित करना है।


