
अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, अल्मोड़ा के तत्वावधान में शुक्रवार को चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने तथा सभी शिक्षकों एवं सरकारी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) बहाल करने की मांग उठाई। इस संबंध में नायब तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री व शिक्षा मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों का चयन उस समय राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया था। ऐसे में वर्तमान सेवा और पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य बनाना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने आरटीई अधिनियम में संशोधन कर अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किए जाने की मांग की।
शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता को पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए “काला कानून” बताते हुए इसका विरोध किया। उनका कहना था कि इससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अधिकार और पदोन्नति प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग भी जोरदार ढंग से उठाई। उनका कहना था कि नई पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को भविष्य की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है। शिक्षकों ने सरकार से सभी शिक्षकों और सरकारी कार्मिकों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन योजना को शीघ्र बहाल करने तथा दोनों मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
धरना-प्रदर्शन में शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष किशोर जोशी, जिला मंत्री जगदीश भंडारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल काण्डपाल, प्रकाश जोशी, मोहन चंद पांडे, जीवन मेहरा, ललित पांडे, मनोज पाठक, दिनेश भंडारी, गणेश भंडारी, नवीन जोशी, नायला अमन, पूनम शाह, मीना शर्मा सहित सभी विकासखंडों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शिक्षक मौजूद रहे।


