
अल्मोड़ा। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन की लमगड़ा शाखा ने शुक्रवार को तहसीलदार करिश्मा जोशी के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न मांगें उठाईं।
ज्ञापन में संगठन ने मांग की कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले विधिवत चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी वैधानिक छूट दी जाए। संगठन का कहना है कि इन शिक्षकों ने वर्षों तक दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देकर अपनी योग्यता और अनुभव साबित किया है, इसलिए नियुक्ति के कई वर्षों बाद टीईटी अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है।
संगठन ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि वर्तमान एनपीएस और यूपीएस व्यवस्था कर्मचारियों को पर्याप्त सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराती। इसके अलावा शिक्षा मित्रों और अंशकालिक शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि, अनुभव और योग्यता के आधार पर नियमित नियुक्ति देने की मांग भी की गई।
ब्लॉक अध्यक्ष गणेश सिंह भण्डारी ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं और उनकी लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए, ताकि वे पूरी निष्ठा के साथ शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बना सकें।
ज्ञापन कार्यक्रम में ब्लॉक कोषाध्यक्ष मदन मोहन शर्मा सहित गिरीश पाठक, ललित चन्द्र, हरीश चन्द्र सिंह मनराल, राजीव सिंह, शिव शंकर राणा, नवीन सिंह राणा, तरुण वर्मा, श्रवण कुमार, दीपक सिंह बिष्ट, निशान्त सैनी, प्रवीण छिमवाल, ललित कुमार और जीत सिंह रावत सहित अनेक शिक्षक मौजूद रहे। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

