
अल्मोड़ा। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की ओर से गुरुवार को प्रवासी पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत की अध्यक्षता आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी ने की। कार्यक्रम में प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने और गांवों में आजीविका के अवसर बढ़ाने पर चर्चा की गई। वरिष्ठ शोध अधिकारी गंगा प्रसाद लखेड़ा ने बताया कि प्रवासी पंचायत का उद्देश्य उन लोगों के अनुभव साझा करना है, जो रोजगार के लिए गांवों से शहरों या राज्य से बाहर गए, लेकिन अब अपने मूल निवास में उद्यमिता और स्वरोजगार के प्रति रुचि रखते हैं। इसके माध्यम से अन्य लोगों को भी गांवों में रहकर रोजगार के अवसर विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। डॉ. एस.एस. नेगी ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विभागों के माध्यम से स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही है और रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक प्रवासियों और ग्रामीणों तक पहुंचाई जाए, ताकि लोग योजनाओं का लाभ उठाकर गांवों में रोजगार के अवसर विकसित कर सकें। आयोग के सदस्य सुरेश सुयाल ने सुझाव दिया कि गांवों में ग्रामोत्सव जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिससे ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ पलायन पर भी अंकुश लगाया जा सके। सदस्य सचिव भरत चंद्र भट्ट ने बताया कि ग्राम्य विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों और प्रवासियों को लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनआरएलएम के तहत गठित समूहों और सीएलएफ की महिलाओं द्वारा अदरक, हल्दी, रोजमेरी, डेण्डेलियम, गुलदाउदी और बागवानी जैसे कार्य क्लस्टर स्तर पर किए जा रहे हैं। इसके अलावा मनरेगा, मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और अन्य योजनाओं के जरिए ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रवासी पंचायत में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी प्रतिभाग कर विभागीय स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी।

