
नई टिहरी(आरएनएस)। पौष माह के मरोज त्योहारों और मकर संक्रांति पर्व के बाद गडूगाड़ पट्टी के पांच गांव के संयुक्त प्रयासों से जीवाणू थान में पारंपरिक गेंदवा हिडोला मेला हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रासौ नृत्य प्रस्तुत किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने लोकनृत्य और लोकगीतों के माध्यम से सांस्कृतिक एकता, भाईचारे व सामूहिक उल्लास का संदेश दिया। गडूगाड़ पट्टी के देवजानी, जीवाणू, खेड़मी, डाण्डा गांव और बेष्टी पांच गांव के प्रयास से बीते बृहस्पतिवार को जीवाणू थान में पारंपरिक गेंदवा हिडोला मेला संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक व सांस्कृतिक मेले में पांच गांवों के अलावा मोरी, पुरोला क्षेत्र और आसपास की अन्य पट्टियों से बड़ी संख्या में युवक, महिलाएं व बुजुर्ग शामिल हुए। मेले का मुख्य आकर्षण साटी एवं पान साई दो परंपरागत थोकों के बीच खेला जाने वाला पारंपरिक गेंद खेल रहा, जिसमें हार व जीत का निर्णय परंपरा अनुसार किया गया। ग्रामीण सुरेंद्र देवजानी ने बताया कि परंपरा के अनुसार दोनों धड़ों की ओर से बारी-बारी से सात बार दोनों थोकों के बीच गेंद फेंककर खेल खेला जाता है। ढोल-दमाऊं व अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर प्रारंभ हुआ। यह आयोजन अनुशासन, सामूहिकता व खेल भावना की लोक परंपरा की जीवंत मिसाल प्रस्तुत करता है। गेंद खेल के बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक रासो नृत्य प्रस्तुत किया। ग्रामीण सोवेंद्र, जोगेंद्र ने कहा कि यह मेला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोकसंस्कृति, परंपरा एवं सामाजिक एकता को संजोए रखने का महत्वपूर्ण आयोजन है।

