
उत्तरकाशी(आरएनएस)। भैरव चौक स्थित दत्तात्रेय मंदिर का दरवाजा बाड़ाहाट के आराध्य कंडार देवता की देवडोली के सानिध्य में वसंत पंचमी पर करीब पांच दशक बाद विधिविधान के साथ खोला गया था। पुजारी पुरी परिवार और स्थानीय लोगों की ओर से दीया जलाकर वहां पर दोबारा पूजा करने का संकल्प लिया गया। साथ ही जल्द ही इसके जीर्णोद्धार के लिए समिति का निर्माण कर कार्य शुरू करवाया जाएगा। बाड़ाहाट क्षेत्र में करीब 13वीं सदी में हाड़ी और पहाड़ी शैली में बना दत्तात्रेय मंदिर पर करीब पांच दशक से ताला लगा हुआ था। वर्ष 1950 में मंदिर से दत्तात्रेय की मूर्ति चोरी हो गई थी। उसके बाद कुछ वर्षों तक वहां पर घुमक्कड़ी साधु निवास करते थे। मंदिर के संरक्षण को देखते हुए वहां पर ताला लगा दिया गया था। करीब पांच और छह दशक से मंदिर अपने जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा था। क्योंकि इसके पास मंदिर शृंखला में शामिल परशुराम, चमाला की चौरी, अन्नपूर्णा मंदिर का जीर्णोद्धार हो चुका है। सभासद अमेरिकन पुरी ने बताया कि पुजारी पुरी परिवार के लोगों और स्थानीय निवासियों ने आपसी सहमति पर इसके दरवाजे खोलने पर विचार किया गया। इसके बाद बाड़ाहाट के आराध्य कंडार देवता से इस संबंध में अनुमति ली गई तो उन्होंने वसंत पंचमी पर मंदिर के दरवाजे खोलने के आदेश दिए। इसलिए शुक्रवार को देव डोली के सानिध्य में मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे खोलकर वहां पर दीपक जलाकर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर का इतिहास राहुल सांकृत्यायन की यात्रा संस्मरण सहित कई इतिहास की किताबों में मिलता है कि यह 13वीं और 14वीं शताब्दी में बनाया गया मंदिर है।

