
देहरादून। बर्खास्तगी के विरोध में विधानसभा भवन के बाहर धरना दे रहे बर्खास्त कर्मचारियों को बुधवार को पुलिस ने वहां से हटा दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। पुलिस को प्रदर्शनकारियों के साथ काफी जोरआजमाइश करनी पड़ी। कई महिलाएं सड़क पर ही बैठ गईं। पुलिस ने वाहनों में बैठाकर बर्खास्त कर्मचारियों को एकता विहार स्थित धरना स्थल छोड़ा। उत्तराखंड विधानसभा के बर्खास्त कर्मचारी सोमवार से विस भवन के बाहर धरना दे रहे थे। कर्मचारी धरनास्थल पर क्रमिक अनशन पर बैठ रहे थे। मंगलवार शाम को कर्मचारियों ने बहाली की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर कैंडल मार्च भी निकाला था। बुधवार को भी बर्खास्त कर्मचारी सुबह साढ़े नौ बजे से धरना देने के लिए विधानसभा भवन के बाहर पहुंचने लगे थे, लेकिन सुबह से ही मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात था। साढ़े नौ बजे चार-पांच कर्मचारी पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठा दिया। इसके बाद लगभग 11 बजे बर्खास्त कर्मचारी जुलूस निकालते हुए विधानसभा भवन के बाहर पहुंचे। विधानसभा अध्यक्ष और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यहां पुलिस ने महिला और पुरुष कर्मचारियों को जबरन पुलिस वाहनों में बैठाना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी झड़प हुई। काफी जोर जबरदस्ती के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाया और एकता विहार स्थित धरना स्थल पर छोड़ा। सीओ अनिल जोशी ने बताया कि विधानसभा के बाहर प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। इसलिए धरना दे रहे कर्मचारियों से कहा गया था कि वे अधिकृत धरना स्थल एकता विहार में जाएं, लेकिन वे बुधवार को भी धरना देने विधानसभा भवन के बाहर पहुंच गए। इसलिए प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाकर एकता विहार स्थित धरना स्थल छोड़ा गया है। उधर, आंदोलित कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जबरदस्ती धरना समाप्त कराने के लिए सरकार ने पुलिस को आगे किया। आंदोलित कर्मचारियों का कहना है कि उत्तराखंड विधानसभा में सात वर्षों से विभिन्न संवर्गों में तदर्थ कर्मचारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कर्मचारियों की सेवाओं को बिना कोई कारण बताए और बिना शो कॉज नोटिस दिए समाप्त कर दिया गया। इससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार के भरण पोषण और रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
