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वट सावित्री व्रत पूजा प्रविधि, महत्व

RNS INDIA NEWS 10/06/2021
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अल्मोड़ा। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित मदन मोहन पाठक ने बताया कि इस साल वट सावित्री व्रत दिनांक 10 जून यानि आज है। आज सूर्य ग्रहण है लेकिन आंशिक सूर्यग्रहण होने के कारण इसका भारतवर्ष में किसी प्रकार का कोई धार्मिक महत्व नहीं होगा। अतः सभी सौभाग्यवती स्त्रियां अपने अटल सौभाग्य के लिए निश्चिन्त होकर वट सावित्री व्रत करें। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन माता सावित्री ने अपने अटूट आस्था और पतिव्रता धर्म द्वारा यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे और अपने पति की जीवनदान दिलाया था तब से सभी सौभाग्यवती स्त्रियां इस व्रत को करती आ रही है इस दिन स्त्रियां अपने पति के दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए माता सावित्री से प्रार्थना करती है। बहुत सारी स्त्रियां वट वृक्ष के नीचे बैठकर या अपने घर पर एक चित्र जिसमें वट वृक्ष सावित्री सत्यवान और भैंसे पर सवार यमराज होते हैं उनकी पूजा करते हैं, माता सावित्री को समस्त श्रृंगार का सामान चुनरी एवं सत्यवान को धोती कुर्ता एवं दैनिक पूजा की वस्तुओं जैसे पान, सुपारी, लौंग, इलायची, जलाने का कपूर, धूप, गोला, फल, पंचमेवा, पंचमिठाई, बताशे, ऋतुफल इत्यादि अर्पित किए जाते हैं। पुरोहित द्वारा स्वस्तिवाचन, गणेश पूजा, मातृ पूजा एवं सत्यवान और माता सावित्री का षोडशोपचार पूजन संकल्पित होकर किया जाता है पूजा अर्चना के बाद अगर वट वृक्ष है तो उसकी प्रदक्षिणा निराजन किया जाता है नहीं तो अपने स्थान पर सात परिक्रमा करें और निराजन करें। विप्र को यथाशक्ति अन्नदान करें दक्षिणा दें और विप्र से मंत्राशीष लें। ऐसा करने से आपके जीवन में सुख शांति समृद्धि रहेगी और आपका सौभाग्य अटल रहेगा। सतोगुण युक्त भोजन आप सूर्यास्त के बाद कर सकते हैं। अगर कोई महिला जिसने इससे पूर्व यह व्रत नहीं लिया है तो वह ज्योतिषी से संपर्क कर अपनी और अपने पति की राशि बताकर पूछवा लें इस बार मिथुन राशि तुला राशि और कुंभ राशि वालों को दिन अपैट यानि प्रतिकूल है इस राशि वाले जो पहली बार व्रत उठा रहे हैं ना उठाएं शुभ अवसर का इंतजार करें। जिन्होंने पूर्व से उठाया है वो निश्चिन्त होकर वटसावित्री व्रत करें।

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